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Important Questions for CBSE Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 Poem Ruwaiya, Gazal

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Last updated date: 29th May 2024
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CBSE Class 12 Hindi Aroh Important Questions Chapter 9 Poem Ruwaiya, Gazal - Free PDF Download

Free PDF download of Important Questions with solutions for CBSE Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 Poem Ruwaiya, Gazal prepared by expert Hindi teachers from latest edition of CBSE(NCERT) books.

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Study Important Questions Class 12 Hindi Chapter 9 – रुबाइयाँ, ग़ज़ल

अति लघु प्रश्न                                                                                        (1 अंक)

1. पासे-अदब तथा बदुरुस्ती-ए-होशों-हवास का शब्दार्थ बताइए। 

उत्तर:  बदुरुस्ती-ए-होशों-हवास - विवेक के साथ, धैर्य से 

पासे-अदब - सम्मान, आदर 

 

2. बच्चा किस चीज़ को पाने की ज़िद करता है?

उत्तर: बच्चा अपनी माँ से आसमान में चमकते हुए चाँद को पाने की ज़िद करता है। 


3. बागों में सुगंध कब फैल जाती है?

उत्तर: जब बागों में कलियाँ खिल जाती तब सुगंध हवा एवं आस पास पास के वातावरण में फ़ैल जाती है। 


4. कवि ने किसे गोदी का चाँद कहकर सम्बोधित किया है?

उत्तर: कवि ने माँ-बेटे के रिश्ते को संभोदित करते हुए बेटे को माँ के गोदी का चाँद कहा है। 


5. दूसरे की बुराई करने वाले लोग क्या प्रदर्शित करते हैं?

उत्तर: दुसरे की बुराई करने वाले लोग अपनी कमियों को दर्शाते हैं। 


लघु उत्तरीय प्रश्न                                                                                            (2 अंक)

1. कवि किस्मत पर रोते क्यों हैं?

उत्तर: कवि कहते है की उनकी किस्मत उनका कभी साथ नहीं देती जिसके कारण वे अपने भाग्य पर रोते है अर्थात अपने भाग्य से निराश रहते है। 


2. किस्मत कवि  के ऊपर क्यों रोती है?

उत्तर: किस्मत कवि के ऊपर इसलिए रोती है क्यूंकि वह कवि की कर्महीनता से परेशान है अथवा उसे उसकी कमियों का दोषी मानती है। 


3. इस कविता में कवि ने निंदक किसे कहा है?

उत्तर: कवि अपनी कविता में कहते हैं की वे लोग जो दुसरो की बुराई करते हैं,  बिना कारण उनमे कमियाँ ढूँढ़ते हैं बिना अपने गिरेबान में झांके। ऐसे लोग निंदक हैं। 


4. समाज के नज़रो में कौन पागल होता है और क्यों?

उत्तर: कवि कहते हैं की प्रेम करने वाले पागल  होते है क्यूंकि वे प्रेम के चलते सब कुछ भूल जाते हैं अर्थात अपने सूझ-बूझ की छमता बैठते हैं अथवा एक प्रेमी अपने दूसरे प्रेमी के लिए कुछ भी कर सकता है तथा दीवाना होता है। 


5. कवि अपनी प्रेमिका से क्या कहता है?

उत्तर: कवि अपनी प्रेमिका को कहते हैं की उन्हें वियोग से हुई उनकी पीड़ा, दुःखो का ज्ञान है और वे इससे अछूते नहीं है परन्तु समाज और दुनिया क्या सोचेगी अगर वो ऐसे क्रंदन करेंगे? इसीलिए वे अपने आंसू छुपाते हैं ताकि संसार में उनके प्रेम को  कमज़ोर न समझा जाए। 


लघु उत्तरीय प्रश्न                                                                               (3 अंक)

1. कवि के अनुसार रक्षाबंधन क्या है?

उत्तर: कवि अपने काव्य में बताते है की रक्षाबंधन एक पावन पर्व  है जो सावन के मधुर मौसम में मनाया जाता है। सावन में जैसे काली घटाएं आकाश में छा जाती है उसी प्रकार रक्षाबंधन में रंग-बिरंगी राखियों के गुच्छों से बाजार भर जाता है। जैसे सावन में बिजली घटाओ में चमकती है प्रकार राखियां भी चमकती है जो बेहेन अपनी भाई के कलाई पर सजाती हैं। 


2. माँ को अपनी गोद में सोया बच्चा कैसा लगता है?

उत्तर: प्र्त्येक माँ के लिए उसका बच्चा चाँद समान होता है यही बात को कवि अपनी कविता में व्यक्त करते है की माँ को अपनी गोद में सोया हुआ बच्चा चाँद के समान सुन्दर और बेदाग़ लगता है अर्थात माँ की ममता इतनी असीम है की आसमान के चाँद और अपने बच्चे के मुखड़े में कोई फर्क मालूम नहीं होता अर्थात माँ के लिए आसमान का चाँद और गगन का चाँद एक हैं। 


3. कर्महीन लोगों के लिए कवि क्या कहते है?

उत्तर: कर्महीन व्यक्ति वो होता है जो अपने कर्म को कम तथा भाग्य को ज्यादा मानता है। ऐसे व्यक्ति के लिए कवि कहते हैं की जो अपने भाग्य को अपने कर्म के आड़े आने दे ऐसे व्यक्ति हमेशा अपने जीवन से असंतुष्ट एवं दुखी  हैं तथा भाग्य इनसे दुखी रहता है क्यूंकि ऐसे लोग कर्म से भागते हैं और कार्य को अंजाम देने के लिए भाग्य पर निर्भर रहते है। 


4. राखी के लच्छे किसकी तरह है?

उत्तर: कवि कहते है की राखी के लच्छे सावन की काली घटाओं के समान होते है। जिस प्रकार आसमान में  काली घटाए छा जाती हैं और बिजली उनमे से चमकती है उसी प्रकार राखी के लच्छे भी सावन में बाज़ारों में चमकते हैं जिन्हे बहन भेंट स्वरुप अपने भाई की कलाई पर सजाती हैं। 


5. नौरस गुंचे पंखडियों की नाजुक गिरहें खोल हैं..... या उड़ जाने को रंगो-बू  गुलशन में पर तोलें हैं। इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि “ श्री फ़िराक  गोरखपुरी” के ग़ज़ल की पहले अंश से ली गयी हैं। निम्न में कवि कहना चाहते है की जब वसंत ऋतु आती है तब नई पत्तियाँ, फूल आदि आते है।  जब नन्ही, रंगो से भरी कलियाँ एक सुन्दर फूल का रूप लेती हैं तो वह अपनी सुगंध और रंगों से सारे वातावरण को  मोहित कर देती हैं अर्थात पूर्ण प्रकृति मिलकर अपनी सौंदर्य का प्रभावशाली छाप छोड़ देना चाहती है। 


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न                                                                                                                (5 अंक)

1. “रक्षाबंधन की सुबह रस की पुतली ........  भाई के है बांधती चमकती राखी” इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिये। 

उत्तर: कवि ने अपने काव्य में दो त्योहारों का ज़िक्र किया है जिसमे से एक है रक्षाबंधन का पावन पर्व।  कवि बताते है की रक्षाबंधन की सुबह शुभ एवं रिश्तों की मिठास से पूर्ण होती है। सावन के महीने में पड़ने वाला ये त्यौहार अपने साथ बिजली और बादल की काली घटाए साथ लिए आता है। कवि ने बड़े ही सुन्दर तरीक़े से सावन और राखी का मेल  बताया है की जैसे काली घटा आसमान में छा जाती है उसी प्रकार सावन में राखी के गुच्छे बाजार में छा जाते हैं अथवा जिस प्रकार बिजली चमकती है उसी प्रकार राखी के धागे भी भाई की कलाई चमकते हैं अथवा बादल और बिजली के पवत्रिता के समान ही भाई और बहन का रिश्ता भी होता है। 


2. ‘रुबाइयाँ’ का सारांश लिखिए।  

उत्तर: काव्य रचना ‘रुबाइयाँ’ रिश्तो के नर्म बंधन के इर्द गिर्द घूमती है। पहला बंधन है माँ और बच्चे का। माँ की ममता की चर्चा में कवि ने बताया है की माँ की गोद में पड़ा उसका बच्चा चाँद के समान है।  माँ अपने बच्चे को आँगन में  झूला झुलाती है, उसे निर्मल पानी से नहलाकर उसे सुन्दर वस्त्र पहनाती है, बालों में खंघी करती है। जितने प्यार से माँ उसकी सेवा करती है उतने ही प्यार से बच्चा माँ को निहारता है। दिवाली की शाम रंगो से पुते और सजे है। माँ अपने बच्चे के लिए चीनी-मिटटी के नए खिलौने ला उसको खुश कर देती है तथा अपने सुन्दर से मुखड़े पर एक नरम मुस्कान लिए हुए अपने बच्चे के बनाये माटी के घर में भी दीपक जलाती है।  इसी बीच बच्चा आँगन में खड़ा, आकाश में चाँद को देख उसे पाने की ज़िद कर बैठता है जिसे माँ अपनी सूझ-भूझ और नर्मता से आईने में उतार दिखाती है।  दूसरा बंधन जिसे कवि दर्शाते हैं वो है भाई-बहन का। रक्षाबंधन रिश्तो की मिठास का पर्व है। कवि कहते है सावन में पड़ने वाला यह पर्व आसमान से गिरते जल के समान पवित्र है। रक्षाबंधन में मिलने वाली राखियाँ, काले बादल के समान गुच्छों में बाजार  देती है तथा बिजली  समान चमकती हैं  बहने अपने अपने भाइयो की कलाई पर सजाती हैं। 


3. ‘ग़ज़ल’ का सारांश लिखिए। 

उत्तर: शायर “फ़िराक गोरखपुरी” अपनी ग़ज़ल में अपने प्रेम से सम्बंधित कुछ आप-बीती बताते है। वे वसंत ऋतु में आई नई कालिया जो फूल का रूप ले रहीं है से शुरू करते हैं और बताते है की फूल अपनी सुगंध और रंग से आसमान को भर देना चाहते हैं।रात में जब तारे भी निंद से आँखे झपका टिमटिमाते है, जब सब कोई नींद में होता है तब उन्हें सन्नाटे में अपने प्रेमिका की याद आती है। कवि अपनी प्रेमिका के वियोग से दुखी हैं अथवा अपनी किस्मत को दोष देते है और किस्मत उनकी इस पीड़ा को देख रोती है।वे कहते है कि जो लोग उनके प्रेम की निंदा करते है वे उनकी नहीं अपनी कमी दर्शा रहे हैं। कवि अपनक प्रेमिका के प्यार में पूरी तरह दीवाना हो चुके है अथवा जब ये वियोग की पीड़ा बढ़ जाती है तो वे दुनिया की नज़रो से दूर छुप के रो  लिया करते है ताकि संसार उनके प्रेम को कमजोर न समझे। कवि अपने दुःख में ये भी कहते है की हर कोई ये प्रेम नहीं कर सकता क्यूंकि उसके लिए खुद को पूरी तरह खोना पड़ता है। कवि के दुःख का माप तब मालूम होता है जब वे  कष्ट को गलत करने के लिए शराब का सहारा ले लेते है। कवि की ग़ज़ल इतनी मोहित कर देने वाली होती है की उनकी तुलना श्रोता ‘मीर’ से करते है। 


4. “आँगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी ...... करके जब घुटनियों में ले के हैं पिन्हाती कपड़े।” इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तिया कविता ‘रुबाइयाँ’ के पहले छंद से ली गई हैं।  निम्न पंक्तियों में माँ और बच्चे के स्नेह का परिचय दिया गया है। माँ अपने चाँद जैसे बच्चे को आँगन में अपनी गोद में लिए  उछाल-उछाल कर झूला रही है जिससे बच्चा आनंदित हो खिलखिला उठता है। माँ बच्चे को स्नेहपूर्ण निर्मल जल से नहलाती है, उलझे हुए केशो में कंघी करती है, साफ़ सुन्दर कपड़े पहनाती है। माँ और बच्चा एक दूसरे को निहारते हैं जो की एक अद्भुत, पवित्र प्रेम का दर्पण है 


5. “दिवाली की शाम घर पुते और सजे....... देख आईने में चाँद उतर आया है” इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर: उपरोक्त पंक्ति कविता ‘रुबाइयाँ’ से ली गयी है। कवि ने कविता में  बड़ी ही कुशलता से माँ और बच्चे के स्नेह और ममता का चित्रण किया है। कवि कहते है की दिवाली की संध्या हर घर रोशन और रंगो से पुता हुआ होता है, ऐसे में माँ अपने बच्चे की ख़ुशी के लिए नए चीनी-मट्टी के खिलौने लाती है जिसे देख उसका बच्चा आनंदित हो उठता है और उसकी ख़ुशी देख माँ भी मुस्कुराने लगती है तथा अपने बच्चे के छोटे से घरोंदे में दिया जलाती है। रंग-बिरंगे पुते घर और दियों के उजाले से बना माहौल देख सभी खुश हैं ऐसे में बच्चा आँगन में खड़ा हो चाँद की चमक देख मोहित हो जाता है और अपनी माँ से चाँद को पाने की हट करता है। माँ बड़ी ही दुलार से उसे चाँद आईने में उतार कर  दिखती है और उसे खुश कर देती है। 


Study Important Questions Class 12 Hindi Chapter 9 – रुबाइयाँ, ग़ज़ल

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FAQs on Important Questions for CBSE Class 12 Hindi Aroh Chapter 9 Poem Ruwaiya, Gazal

1. What sentiment does the poet want to convey by referring to Rakhi's lace-like flash of lightning?

The poet wants to tell that the festival of Rakshabandhan is celebrated in the month of Sawan, by saying that Rakhi's stick is like a flash of lightning. These days it rains heavily, just as lightning flashes in the clouds, sisters tie shining Rakhi in the hands of their brothers. The relation of Sawan is related to water, the relation of Ghata with electricity and it is the same relation as that of a brother. Lachha of Rakhi symbolizes the same relation.

2. What is meant by “खुद का परदा”?

By “खुद का परदा”, the poet's intention is to reveal his own evils or weaknesses. According to the poet, the person who does evil to them, knowingly or unknowingly reveals his own weakness in front of the world. When a person reveals his secret, he himself does not know. By opening one's own veil, it means showing one's true nature. When we try to make someone else naked, we ourselves become naked. It is a means of revealing another's secret.  To revise the concepts students can download the PDF of important questions free of cost from the vedantu website (vedantu.com).

3. Make a comment on “गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता”.

गोदी के चाँद means the child makes the mother happy and गगन के चाँद makes the child happy and it means the dock moon. For every mother, her child is as beautiful and dear as the moon and the child is attracted by the moon, she takes him as her own. She wants to take her child in her hands. Every relationship between a mother and her child is pure and beautiful.  Thus, this is a relationship of love and attraction between the two. To understand more about the poetic features of this poem, visit the Vedantu app.

4. Who wrote the Chapter 9 Poem Ruwaiya, Gazal of Class 12 Hindi Aroh?

Firaq Gorakhpuri was a well-known Urdu-Persian poet. He was born on August 28, 1896, in Gorakhpur. His original name was Raghupati Sahai 'Firak'. He started his education with the stories of Ramakrishna. Later, he received his education in Arabic, Persian and English. In 1917, he was elected to the post of Deputy Collector, but due to the freedom movement, he left this post in 1918. In 1920, he was imprisoned for one and a half years for participating in the movement.

5. Which material is best for Chapter 9 Poem Ruwaiya, Gazal of Class 12 Hindi Aroh?

For the board test, Vedantu provides Hindi NCERT Class 12 Solutions. These solutions are designed to help applicants achieve academic success. The NCERT Hindi Class 12 Solutions are written chapter by chapter and may be thought of as a collection of essential questions for the test. These solutions might assist students who are having difficulty answering the exercise problems. These solutions for Hindi Class 12 NCERT Solutions have been written by Vedantu professionals in a simple way that any student can comprehend and memorise.