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CBSE Class 5 Hindi Chapter 2 Nyay Ki Kursi Notes 2025-26

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CBSE Class 5 Hindi Chapter 2 Nyay Ki Kursi Question Answer Notes FREE PDF Download

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CBSE Class 5 Hindi Chapter 2 Nyay Ki Kursi Question Answer Notes FREE PDF Download

“न्याय की कुर्सी” अध्याय, जिसका रचनाकार लीलावती भागवत हैं, न्याय, विवेक और नैतिकता पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत करता है। यह कहानी उज्जैन की ऐतिहासिक भूमि पर आरंभ होती है, जहाँ कुछ बालक मैदान में खेलते समय एक चमकदार पत्थर (जो आगे चलकर राजा विक्रमादित्य का सिंहासन सिद्ध होता है) खोज लेते हैं। बालकों ने उसे सिंहासन मानकर न्याय का खेल आरंभ किया, जिसमें वे राजा, दरबारी और प्रजा की भूमिका निभाते हैं। उनका यह खेल इतना रुचिकर और न्यायपूर्ण हो गया कि नगर के वास्तविक झगड़ों का समाधान भी इसी 'न्याय की कुर्सी' पर होने लगा।

मूल कथा का प्रवाह

सिंहासन पर बैठने वाला बालक खेल-खेल में सभी फरियादियों की बातें गंभीरता एवं निष्पक्षता से सुनता था। धीरे-धीरे नगर के लोग इस न्यायप्रियता से इतने प्रभावित हुए कि अपने विवाद सुलझाने के लिए बालक 'राजा' के पास आने लगे। न्याय सुनाने की यह प्रक्रिया इतनी प्रसिद्ध हो गई कि लोगों ने राजा के दरबार में जाना लगभग छोड़ दिया था। जब इस बात की चर्चा राज्य के राजा तक पहुँची, तो उन्होंने स्वयं आकर बच्चों के खेल को देखा और उनकी निपुणता देखकर चकित रह गए।

वास्तविक सिंहासन की खोज और विशेषताएँ

राजा के आदेश पर पत्थर की खुदाई होने पर वहां से एक अत्यंत सुंदर सिंहासन निकला, जिसकी चारों कोनों पर चार दिव्य मूर्तियाँ उकेरी हुई थीं। विद्वानों ने बताया कि यह सिंहासन महान राजा विक्रमादित्य का था, जिन्हें उनके न्याय और विवेक के लिए सदा स्मरण किया जाता है।

सिंहासन पर बैठने की पात्रता और चार मूर्तियाँ

जब राजा स्वयं सिंहासन पर बैठने जाते हैं, तो चारों मूर्तियाँ क्रमशः उनकी नैतिकता और योग्यता की परीक्षा लेती हैं। पहली मूर्ति राजा से पूछती है कि क्या उसने कभी किसी की संपत्ति छीनी है, दूसरी पूछती है कि क्या उसने कभी झूठ बोला है, तीसरी पूछती है कि क्या उसने कभी किसी को चोट पहुँचाई है और चौथी मूर्ति पात्रता पर बल देती है कि जिस प्रकार बच्चे निष्पक्ष और निष्कपट होते हैं, उसी प्रकार यदि राजा में भी वही गुण हैं, तभी वे सिंहासन पर बैठने के योग्य होंगे। हर बार राजा अपनी कमियों को स्वीकार करता है और प्रायश्चित्त करता है, पर अंततः किसी भी पात्रता परीक्षण में सफल नहीं हो पाता, जिससे चारों मूर्तियाँ उड़ जाती हैं और अंततः सिंहासन भी आकाश में विलीन हो जाता है।

कहानी से सीख और मूल संदेश

“न्याय की कुर्सी” पाठ में यह बताया गया है कि सच्चा न्याय वही कर सकता है, जिसके चित्त में निष्पक्षता, सच्चाई, छलरहितता और दया का भाव हो। राजा विक्रमादित्य का सिंहासन केवल उसी को स्वीकार करता है जिसमें ये गुण हैं, चाहे वह बालक हो या राजा।

महत्वपूर्ण बिंदु एवं परीक्षा की दृष्टि से
  • कहानी न्याय के महत्व और सही फैसले के लिए आवश्यक गुणों जैसे — ईमानदारी, विवेक, निष्पक्षता, और निष्कपटता — को उजागर करती है।
  • चौकसी, अपने दोष स्वीकारना और प्रायश्चित्त करने का महत्व बताया गया है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (राजा विक्रमादित्य, सिंहासन बत्तीसी) का उल्लेख बच्चों में भारतीय परंपरा व नैतिक शिक्षा के प्रति रुचि जगाता है।
  • भाषा की महत्ता, विराम चिह्नों का उपयोग और वाक्य संरचना की स्पष्टता को भी पाठ में स्थान दिया गया है।
  • कहानी के अंत में राजा का स्वयं को असमर्थ मानना, दिखाता है कि सच्चा बल और अधिकार केवल अच्छे गुणों से ही प्राप्त होता है।
प्रमुख पात्र एवं उनकी विशेषताएँ
पात्र मुख्य गुण
राजा स्वीकार्यता, पश्चाताप, आत्ममूल्यांकन
बालक 'राजा' निष्पक्षता, सरलता, विवेक, निष्कपटता
देवदूत मूर्तियाँ परीक्षण, सत्यनिष्ठता का आकलन
विराम चिह्न एवं भाषा की बात

कहानी में 'विराम चिह्न' (Punctuation) के सही प्रयोग पर भी जोर दिया गया है। विराम चिह्न वाक्यों के भाव और ठहराव को स्पष्ट रूप से दर्शाने में सहायक होते हैं। परीक्षा की दृष्टि से उपयुक्त स्थानों पर पूर्ण विराम (।), अल्पविराम (,) और अन्य विराम चिह्न पहचानना तथा लगाना आना चाहिए।

अनुमान व कल्पना शक्ति की वृद्धि

छात्रों को कहानी से जुड़े कुछ प्रश्न जैसे – यदि राजा सिंहासन पर बैठ पाता तो क्या होता, देवदूत मूर्तियाँ कहाँ जातीं, आदि, सोचने-समझने एवं कल्पना शक्ति को बढ़ाने हेतु पूछे जाते हैं। यह रचनात्मकता एवं तार्किक अवलोकन हेतु अत्यंत लाभकारी है।

सिंहासन बत्तीसी का संदर्भ

अध्याय का कथानक 'सिंहासन बत्तीसी' की पारंपरिक कहानियों पर आधारित है, जिसमें राजा भोज और विक्रमादित्य की कथाएँ नैतिक शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के समावेश के लिए विख्यात हैं। विद्यार्थियों को यह अध्याय पढ़कर कहानी का गहराई से अध्ययन और अन्य पारंपरिक ग्रंथों (पंचतंत्र, जातक कथाएँ, हितोपदेश आदि) के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न होती है।

परीक्षा हेतु उपयोगी बिंदु
  • बालकों में न्यायप्रियता, सरलता और निष्कपटता उनके निर्णय को उचित बनाती है।
  • सच्चा नेतृत्व और अधिकार केवल नैतिक गुणों एवं आत्ममंथन से प्राप्त होता है, न कि केवल पद या शक्ति से।
  • सिंहासन का उड़ जाना – सांकेतिक है कि नैतिकता के बिना 'सत्ता' स्थायी नहीं रहती।
  • कहानी में उपयुक्त 'विशेषण' पहचानना, उदाहरण: सुंदर सिंहासन, प्राचीन नगरी आदि परीक्षा बिंदु हैं।
सारांश (Summary)

यह कहानी विद्यार्थियों को नैतिकता, आत्मनिरीक्षण एवं सत्यता का मार्ग अपनाने और जिम्मेदारी पूर्वक फैसले लेने की प्रेरणा देती है। साथ ही, भारतीय सांस्कृतिक गौरव, लोककथा, और भाषा की बारीकियों को भी सरल ढंग से प्रस्तुत करती है।

लेखक परिचय

इस अध्याय की लेखिका लीलावती भागवत हैं। राष्ट्र्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित 'स्वर्ग की सैर तथा अन्य कथाएँ' से इस पाठ को लिया गया है।

Class 5 Hindi Chapter 2 Nyay Ki Kursi Revision Notes – Important Points for Exam Prep

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FAQs on CBSE Class 5 Hindi Chapter 2 Nyay Ki Kursi Notes 2025-26

1. CBSE कक्षा 5 हिंदी अध्याय 2 न्याय की कुर्सी में किन मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए?

न्याय की कुर्सी में सत्य, न्याय, और ईमानदारी अनेक उदाहरणों के माध्यम से समझाए गए हैं।

  • सच्चाई बताना
  • झूठ व अन्याय का विरोध करना
  • साझा निर्णय लेना
  • श्रेष्ठ आचरण दिखाना

2. सभी लड़के सिंहासन पर बैठ पा रहे थे लेकिन राजा नहीं बैठ पाया ऐसा क्यों?

राजा को एहसास हुआ कि वो पूरी तरह निष्पक्ष न्याय नहीं कर सकता था, इसी वजह से सिंहासन उसे स्वीकार नहीं कर रहा था।

3. कक्षा 5 हिंदी के लिए न्याय की कुर्सी अध्याय से कौनसे प्रश्न अक्सर स्कूल परीक्षा में आते हैं?

परीक्षाओं में अक्सर मुख्य पात्र, कहानी का संदेश, व पाठ में दी गई घटनाओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं:

  • न्याय की कुर्सी क्या है?
  • कहानी का मुख्य संदेश बताइए
  • राजा और मित्रों की भूमिका
  • सच्चाई और न्याय का महत्व

4. न्याय की कुर्सी अध्याय के नोट्स पढ़ने से परीक्षा में नंबर कैसे बढ़ें?

नोट्स पढ़ने से छात्रों का उत्तर मजबूत बनता है:

  • उत्तर की प्रस्तुति सुधरती है
  • महत्त्वपूर्ण बिंदु याद रहते हैं
  • लंबे उत्तर संक्षिप्त और प्रभावी बनते हैं
  • पुनरावृत्ति तेज होती है

5. क्या इस अध्याय में चित्र या परिभाषा लिखना अनिवार्य होता है?

नहीं, चित्र बनाना जरूरी नहीं है लेकिन परिभाषा और महत्वपूर्ण शब्द अवश्य लिखें; इससे उत्तर स्पष्ट और सम्पूर्ण बनते हैं।

6. न्याय की कुर्सी अध्याय के लिए उत्तर कैसे लिखें ताकि पूरे अंक मिलें?

पूर्ण अंक के लिए स्तरीय और क्रमबद्ध उत्तर लिखें:

  1. प्रश्न को ध्यान से पढ़ें
  2. मुख्य बिंदु जोड़ें
  3. संक्षेप में घटनाक्रम बताएं
  4. निष्कर्ष अवश्य दें

7. न्याय की कुर्सी कहानी का सारांश क्या है?

यह कहानी निष्पक्षता और सच्चाई के महत्त्व को दर्शाती है जहाँ राजा को भी न्याय करने में कठिनाई महसूस होती है।

  • सच्चाई के मार्ग पर चलना
  • निष्पक्ष न्याय का मूल्यों
  • मित्रता की परीक्षा

8. न्याय की कुर्सी अध्याय के प्रश्नों के उत्तर की पीडीएफ कहाँ से डाउनलोड करें?

पीडीएफ डाउनलोड के लिए पाठ के अंत में उपलब्ध डाउनलोड बटन से सीधे नोट्स और हल पढ़ सकते हैं।

9. कक्षा 5 हिंदी की वार्षिक परीक्षा के लिए न्याय की कुर्सी से क्या-क्या याद रखना चाहिए?

विषयवस्तु, मुख्य पात्र, संदेश, और लेखक द्वारा दिए गए उदाहरण याद रखें:

  • पात्रों की विशेषताएं
  • न्याय की कुर्सी का तात्पर्य
  • मुख्य घटनाओं का क्रम
  • संदेश व निष्कर्ष

10. क्या न्याय की कुर्सी के उत्तर लिखते समय पृष्ठ संख्या लिखनी चाहिए?

नहीं, उत्तर लिखते समय पृष्ठ संख्या लिखना आवश्यक नहीं है; केवल स्पष्ट उत्तर और मुख्य बातें लिखें।

11. न्याय की कुर्सी अध्याय में अक्सर कौनसी गलतियाँ होती हैं?

छात्र सामान्यतः मुख्य घटना छोड़ देते हैं, स्पष्ट शब्द प्रयोग नहीं करते, और उत्तर लंबा खींचते हैं।

  • मुख्य पात्रों के नाम भूलना
  • घटनाओं को गलत क्रम में लिखना
  • उत्तर अस्पष्ट बनाना

12. इन नोट्स का प्रयोग किस तरह से करें ताकि परीक्षा में समय की बचत हो?

संक्षिप्त बिंदुओं और एक लाइन के उत्तरों से तैयारी करें:

  • प्रत्येक प्रश्न के लिए मुख्य बिंदु लिखें
  • Flash notes का उपयोग करें
  • Revision planner अपनाएँ