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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 13 - Sarveshwar Dayal Saxena

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Last updated date: 19th Jul 2024
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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 - Sarveshwar Dayal Saxena PDF Download

With the increasing syllabus for every class, it becomes tough on a student’s part to focus on the literature subjects as well as Mathematics and Sciences. It requires a deeper involvement of a student to study chapters of these language subjects. NCERT Solution for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 makes the studying of the literature subjects quite simple and interesting. Revision of the complete syllabus becomes easy for the students, as a result scoring high marks. Subjects like Science, Maths, English and Hindi will become easy to study if you have access to NCERT Solution for Class 10 Science, Maths solutions and solutions of other subjects. You can also download NCERT Solutions for Class 10 Maths to help you to revise complete syllabus and score more marks in your examinations.


Class:

NCERT Solutions for Class 10

Subject:

Class 10 Hindi

Subject Part:

Hindi Part 2 - Kshitij

Chapter Name:

Chapter 13 - Sarveshwar Dayal Saxena

Content-Type:

Text, Videos, Images and PDF Format

Academic Year:

2024-25

Medium:

English and Hindi

Available Materials:

  • Chapter Wise

  • Exercise Wise

Other Materials

  • Important Questions

  • Revision Notes

Access NCERT Solutions for Hindi क्षितिज Chapter 13 : मानवीय करुणा की दिव्य चमक

1. फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी ?

उत्तर: जिस तरह देवदार का वृक्ष विशाल होता है एवं सबको अपनी छाया में  शरण देकर शीतलता प्रदान करता है ,उसी तरह फ़ादर अपने करुण व्यक्तित्व की वृहद छाया में सबको लेकर प्रेम और वातसल्य से भर देते थे, एवं अगर किसी के भी दुःख दर्द में सामान रूप से डट कर खड़े रहते थे।


2. फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं, किस आधार पर ऐसा कहा गया है?

उत्तर: फादर बुल्के बेल्जियम से जरूर थे किन्तु भारत में आ कर उन्होंने इसको पूर्णरूप से आत्मसात कर लिया था ,यहाँ की भाषा से लेकर परम्परा एवं त्यौहार तक उनके थे, यहां के लोग उनको ज्यादा आत्मीय थे एवं यहाँ की संस्कृति ही उनकी संस्कृति थी ,उन्होंने अपने तन और मन से भारत को ही उनका राष्ट्र मान लिया था।  इसीलिए फादर बुल्के को भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग कहा गया है।


3. पाठ में आए उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे फ़ादर बुल्के का हिंदी प्रेम प्रकट होता है।

उत्तर: फादर इलाहाबाद में "परिमल " 'नाम की संस्था से जुड़े थे , जहाँ वों हिंदी साहित्य की रचना गोष्ठियों में सम्मिलित होते थे एवं अपने विचार रखते थे ।वो दूसरे लेखकों की रचना पढ़ते भी थे एवं उस पर अपनी राय भी देते थे। वो हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित देखना चाहते थे एवं उसके लिए प्रयासरत भी रहते थे, वे हिन्दी वालों द्वारा ही हिन्दी की उपेक्षा परदुखी हो जाते। उन्होंने "ब्लूबर्ड " एवं बाइबल का हिंदी अनुवाद भी किया। फ़ादर बुल्के ने हिन्दी में शोध भी किया, जिसका विषय था - “रामकथा: उत्पत्ति और विकास।”


4. इस पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के की जो छवि उभरती है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: फादर कामिल बुल्के एक कर्मयोगी थे। उनका लम्बा कद, गोरा चेहरा और नीली आँखे उन्हें एक चुम्बकीय आकर्षण  प्रदान करता था। उनका हृदय ममतत्व एवं आत्मीयता का अंतहीन कोष था, उनके चेहरे पर दुखियों के लिए अप्रतिम करुणा दिखती थी।  उनके व्यक्तित्व में एक दिव्य चमक थी। वो अपने आस पास के लोगों को आशीष और प्रेम से भर देते थे। वो भारत की संस्कृति में ना ही सिर्फ रचे बसे थे बल्कि उसके दर्शन को भी चरितार्थ करते थे। वो हिंदी के प्रकांड विद्वान थे एवं रामकथा के भी ज्ञाता थे। वो सबके ही प्रेम एवं श्रद्धा के पात्र थे।


5. लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है?

उत्तर: फादर बुल्के  का हृदय ममतत्व एवं आत्मीयता का अंतहीन कोष था, उनके चेहरे पर दुखियों के लिए अप्रतिम करुणा दिखती थी। उनके ह्रदय में हर एक मानव के लिए जगह थी।  वह हर इंसान के सुख - दुःख में शामिल होते थे ,जहाँ दुसरो के सुख में उनको खुशी मिलती वहीं दुसरो के दुःख बांटने में संतोष की अनुभूति होती। इसलिए लेखक ने फादर को "मानवीय करुणा की दिव्य चमक" कहा है।


6. फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नयी छवि प्रस्तुत की है, कैसे?

उत्तर: जहाँ सामान्यतः संन्यासी सभी प्रकार के मोह से दूर रहते है , खुद को सामाजिक बंधनों से अलग रख कर खुद को ईश्वर से बाँध लेते है एवं उनकी भक्ति में ही लीन रहते है।  वहीं फादर ने खुद को समाज के हर इंसान के प्रेम से जोड़ रखा था, सब के दुःख से दुखी होते एवं खुशी को अपनी मानते। सबके ही दुःख -सुख में शामिल होते। समाज से दूर होने की जगह सारा समाज ही उनका परिवार हो गया था। इसलिए यह कहा जा सकता है की फ़ादर ने सन्यासी की परम्परागत छवि से इतर एक अलग छवि प्रस्तुत की।


7.  आशय स्पष्ट कीजिए –

(1)  नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।

उत्तर: उपरोक्त पंक्ति का आशय है की फादर की मृत्यु पर शोकाकुल होने वालो के नाम गिनने का प्रयत्न भी बेकार है क्युकि फादर के व्यवक्तित्व का प्रभाव ऐसा था की शायद ही कोई हो जो उनके इस तरह से चले जाने के शोक में न हो।


(2) फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है।

उत्तर: जिस तरह एक उदास संगीत मन को एक स्मृति से भर देता है और मन को भी शांत कर देता है , जैसे की यह हमें अपने दुनिया से दूर स्मृति की एक अलग दुनिया में ले जाती है। उसी तरह फादर की स्मृति भी मन को एक असीम शांति प्रदान करती है एवं लेखक को उनके स्मृति के अलग शहर में ले जाती है।


रचना और अभिव्यक्ति 

8. आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्‍यों बनाया होगा ?

उत्तर: फादर बुल्के ने भारत की सभ्यता एवं संस्कृति के महत्ता से प्रभावित होकर एवं इसके समृद्ध इतिहास और जीवन दर्शन से अभिभूत हो कर ही भारत आने का मन बनाया होगा।


9. “बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि - रेम्सचैपल।” - इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ अभिव्यक्त होती हैं? आप अपनी जन्मभूमिके बारे में क्या सोचते हैं?

उत्तर: “बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि - रेम्सचैपल।” - इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम एवं लगाव का भाव व्यक्त होता है ,इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि फादर को अपने जन्मभूमि से  कितना प्रेम एवं लगाव था , वह उसको कितना याद करते थे। मनुष्य भले ही कहीं भी क्यों न पहुँच जाये किन्तु जन्मभूमि से हमेशा ही जुड़ा रहता है , हम भी अपनी जन्मभूमि से ऐसे ही जुड़े है और उसके लिए हमारा प्रेम अनश्वर है।हमे कभी भी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे हमारी जन्मभूमि के गौरव पर कोई आंच आये।


भाषा अध्ययन

12. निम्नलिखित वाक्यों में समुच्यबोध छाँटकर अलग लिखिए –

(क) तब भी जब वह इलाहाबाद में थे और तब भी जब वह दिल्ली आते थे।

उत्तर: और


(ख) माँ ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया।

उत्तर: कि


(ग) वे रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे।

उत्तर: तो


(घ) उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे दो शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर देता था जो किसी गहरी तपस्या से जनमती है।

उत्तर: जो


(ङ्)  पिता और भाइयों के लिए बहुत लगाव मन में नहीं था लेकिन वो स्मृति में अकसर डूब जाते।

उत्तर: लेकिन


Maanaviya Karunaa Ki Divya Chamak - Chapter 13 Hindi Class 10 Kshitij

One of the main textbooks for Hindi Course A is Kshitij. It contains compositions of 17 writers, of which there are poems of nine poets and eight prose pieces. The author of this chapter, Sarveshwar Dayal Saxena, wrote a memoir about his Father Kamil Bullke. He penned down the memories he had with his father. His father Bullke had left Ramschapel in Belgium which was his birthplace, for India. He had a special kind of attachment with the Hindi language and its dialects. At the end of each chapter in the book, there are questions from NCERT which checks how well you have understood that particular chapter.


Why Choose NCERT Solutions Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 Free PDF?

As we already know, a student in his 10th Class has to be very productive to handle every subject that has a vast syllabus. They have to first make an efficient routine for their day-to-day functioning. They would be going to school, going to tuitions, study at home to revise what they were taught, get their extra-curricular work get done and the likes in a day. Already having so much on the platter, it gets very difficult for them to find adequate time to practice the lessons on their own. NCERT Solutions Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 is one of the solutions to eliminate that difficulty. By referring to NCERT Solution Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 you would learn the important points of the chapter that you could recount while taking your examinations in order to score good marks.

The study of literature plays an important part in the holistic growth of a young individual. Scoring well in literature subjects is also equally important. Learning new styles of writing to adhere to the guidelines of the board is in itself a time-consuming process. And, when you are as such running short on time it becomes almost impossible.

Hindi NCERT Solutions Class 10 Kshitij Ch 13 offers you to save some of your time. It facilitates your preparation for the exams coming ahead. You get to manage your time well with the help of the solutions given to the questions from the Class 10 Hindi NCERT Solutions Kshitij Chapter 13.


Why Would You Choose Vedantu for NCERT Solution of Hindi Class 10 Kshitij Chapter 13?

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Not only for Hindi but they also seek answers to questions from various chapters in books from other subjects as well. They like that presentation of the answers in an organized manner. Your standard of preparation goes up with NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Ch 13, and along with it goes up your chances of securing higher marks than before.


NCERT Class 10 Hindi Kshitij Chapterwise Solutions

Below find the list of chapter-wise solutions for NCERT Class 10 Hindi Kshitij-2.

 

NCERT Class 10 Hindi Other Books Solutions


Along with this, students can also view additional study materials for all subjects provided by Vedantu, for Class 10.


Vedantu expert-teachers and subject experts have prepared NCERT Solutions for Hindi and other subjects for all classes. Students are advised to follow the provided solutions strictly to know the type of answer they should write in the exam.  Now very little time is left for the exams, so use your time effectively and efficiently and sit for the CBSE Board exams confidently.

FAQs on NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 13 - Sarveshwar Dayal Saxena

1. What is the Name of the Chapter 13 Hindi Class 10 Kshitij? Who is the Author? Is it a Poem or Prose?

Ans: Maanaviya Karunaa Ki Divya Chamak is a piece of prose written by Sarveshwar Dayal Saxena that features in Class 10th Hindi Kshitij Chapter 13.

2. What does the Author Sarveshwar Dayal Saxena Talk About in Ch 13 Kshitij Class 10 Maanaviya Karunaa Ki Divya Chamak?

Ans: Ch 13 Kshitij Class 10 Maanaviya Karunaa Ki Divya Chamak is a memoir in which the author Sarveshwar Dayal Saxena described his memories that are related to his father Kamil Bullke. His father had a very special attachment to the Hindi language and its dialects.

3. Tell us About the way to Save Time While Answering Questions from Ch 13 Kshitij Class 10 in an Examination.

Ans: Following NCERT Solution of Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13 makes you aware of how precise yet effective the answers can be. Keep your focus on the correct concept and save time and not lose any by sticking to the word limits specified.

4. What is Chapter 13 ‘Manviya Karuna ki Divya Chamak’ of Class 10 Hindi Kshitij textbook   about?

Ans: The Chapter ‘Manviya Karuna Ki Divya Chamak’ is a part of the class 10th Hindi textbook Kshitij. The chapter tells us about the life story of Father Bulcke. He, though, was born in Belgium, in Europe, was influenced by the culture of India and Indian society. The chapter describes how his love for India led to his arrival to the country. The chapter contains the memories and experiences of Father Bulcke in the country he loved and admired.

5. Who was father Bullke as mentioned in Chapter 13 of Class 10 Hindi Kshitij textbook?

Ans: Camille Bulcke was a Jesuit missionary from Belgium. He loved India and hence he came to the country in 1935. He is known and respected across the nation. His deep interest in the Hindi language is evident from the fact that he is known as India’s most renowned Christian Hindi scholar. He came to India also to spread the teachings of Christ. He was inspired by Goswami Tulsidas. He soon became one of the supporters and exponents of Ramkatha.

6. Who is the author of Chapter 13 ‘Manviya Karuna ki Divya Chamak’ of Class 10 Hindi Kshitij textbook?

Ans: The name of the author of the chapter Manviya Karuna Ki Divya Chamak is Sarveshwar Dayal Saxena. He is a famous Hindi poet, writer, columnist as well as playwright. He was one of the seven poets who were first published in one of the Tar Saptak. Born in 1927 in the state of Uttar Pradesh, he went on to become a very important political poet. He won the Sahitya Akademi Award for his collection of poems, Khutiyon Par Tange Log.

7. Which website provides good quality important questions for Chapter 13 of Class 10 Hindi Kshitij textbook?

Ans: It is crucial for an aspiring student to prepare a sufficient number of good quality important questions. The important questions are available in a PDF format on Vedantu and can also be downloaded from the application free of cost. The questions are framed and designed keeping in mind the exam pattern. The trends and patterns of past years’ papers are analyzed critically. The questions provided at Vedantu will give your preparation a major boost.

8. Why should I prefer Vedantu solutions for the Chapter 13 ‘Manviya Karuna ki Divya Chamak’ of Class 10 Hindi Kshitij textbook over others?

Ans: The solutions that are prepared after extensive and intensive research by the faculty at Vedantu bring with them many added advantages. The answers will enable you to understand how to address the demand of the questions. The solutions will also allow you to comprehend the right way of answering the questions and present them in a concise manner. As the solutions cover all the concepts of the chapter, they will also help you in your revision.