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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 1 - Surdas Ke Pad

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Last updated date: 17th Apr 2024
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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 - Surdas ke Pad PDF Download

Introduction to Chapter 1

Chapter 1, “Surdas Ke Pad” is a compilation of 4 short verses of the poem. The pad or poem is written by Surdas, who is one of the most renowned poets of Hindi literature.  


The poem is based on the premise of a conversation between the brother of Lord Krishna and Gopis. The poem depicts the dilemma and grief of departing from the loved one. It is important to understand the background of the poem, in this poem Lord Krishna moved to a different kingdom to fight evil Kans. Upon his departure from the village, the Gopi felt grief and sorrow. 


The poem depicts the conversation between Gopi and the friend and brother of Krishna. He tries to convince the gopi to console them. The poem beautifully depicts the emotions of love and devotion. Surdas is one of the prominent poets who wrote about devotion and love. These pad (poems) are among the most prominent work of Hindi literature.

Class:

NCERT Solutions for Class 10

Subject:

Class 10 Hindi

Subject Part:

Hindi Part 2 - Kshitij

Chapter Name:

Chapter 1 - Surdas Ke Pad

Content-Type:

Text, Videos, Images and PDF Format

Academic Year:

2024-25

Medium:

English and Hindi

Available Materials:

  • Chapter Wise

  • Exercise Wise

Other Materials

  • Important Questions

  • Revision Notes



About the poet

Surdas was a blind Hindu devotee writer and vocalist who wrote compositions in devotion to Krishna, the greatest deity, in the 16th century. He was a famous Vaishnava, and all Vaishnava traditions honour and revere him. His works of literature were usually written in Braj Bhasha, which is one of Hindi's two great literary dialects.


Poems credited to Surdas were gradually produced and compiled, growing from a reservoir of approximately 400 poems in existence in the 16th century to the 20th century. The Sursagar's current fame is built on depictions of Krishna as a charming kid, usually from the point of view of one of Braj's cow herding women (gopi). 


The Sursagar, in its 16th-century version, focuses on representations of Krishna and Radha, as well as the yearning (viraha) of Radha and the gopis for Krishna while he was missing, and a set of writings wherein the gopi chastise Krishna's messenger Uddhava for efforts to satisfy them with his transcendental presence once he has finally left their midst. This form of writing is specifically discussed in the chapter.


The knowledge of the works of Surdas is one of the important milestones in the learning process of Hindi literature students. The poems not only are important academically but teach love and devotion. The work of Surdas also helps students in understanding the rich heritage of the ancient dialect of Braj.  

Learning a language expands your horizon of conversation and augments your mental growth. A report said that there are nearly 490 million Hindi language speakers worldwide. This data ignites a necessity for learning the language Hindi.

Kshitij, which translates into ‘horizon’ in Hindi, tries to explore the stories and poems of great learning. This Class 10 Kshitij Chapter 1 Kavya Khand combines padh (poetry) of Krishna devotee Surdas from Bhramar Geet. The poet wrote in Braj language which described Lord Krishna’s childhood and the conversation between gopis.

NCERT solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 try to present the conversation between messenger Uddhav and gopis in a lucid language. Students, by thorough reading, will understand the simplicity of prem raas used by Surdas.

These solutions simplify the meaning of four stanzas for a better understanding of students. Surdas has used satire to portray the pain of separation and wait, which the gopis or female devotees suffer.


By reading the NCERT solution, a student will have a better knowledge of the elements of Hindi poetry like taal or rhythm, tukaant, free verse and metre. This will help them score better and expand their knowledge of poetry and prose. Download NCERT Solutions Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 pdf now for the better understanding of the chapter. Maths Students who are looking for better solutions ,They can download Class 10 Maths NCERT Solutions to help you to revise complete syllabus and score more marks in your examinations. Science Students who are looking for NCERT Solutions for Class 10 Science will also find the Solutions curated by our Master Teachers really Helpful.

Access NCERT Solutions for Class 10 Hindi क्षितिज II Chapter 1 पद, लेखक - सूरदास

कविता भावार्थ:

1) ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।

अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।

पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।

ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।

प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।

‘सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी।

उत्तर: उपरोक्त पंक्तियों में गोपियां उद्धव को व्यंग करते हुए कहती हैं कि तुम बहुत भाग्यशाली हो जो किसी के प्रेम में नहीं पड़े अर्थात तुम ने कृष्ण से प्रेम नहीं किया। तुम्हारी दशा कमल के पत्ते के समान है जो हमेशा जल में रहकर भी उसमें डूबता नहीं है और तेल के मटके जैसी भी है जो पानी के संपर्क में आकर भी पानी से खुद को अलग रखता है। यही कारण है गोपियां उद्धव को भाग्यशाली समझती हैं जो कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम और स्नेह से वंचित है और उधो कृष्ण रूपी प्रेम की नदी के साथ रहते हुए भी उसमें स्नान करने की बात तो दूर, उस पर तो श्री कृष्ण प्रेम की एक छींट भी नहीं पड़ी। गोपियां खुद को अभागिन नारी समझती हैं क्योंकि वह पूरी तरह कृष्ण के प्रेम में पड़ चुकी हैं। उनके अनुसार श्रीकृष्ण के साथ रहते हुए भी उधो, कृष्ण के प्रेम रूपी दरिया में कभी पॉव नहीं रखा और उनके कभी उनके रूप सौंदर्य का दर्शन नहीं किया। गोपियां कृष्ण के प्रेम में इस तरह पढ़ चुकी हैं मानो जैसे गुड़ में चीटियां लिप्टी रहती है। वह उनके प्रेम में लीन रहती हैं।

2) मन की मन ही माँझ रही।

कहिए जाइ कौन पै ऊधौ, नाहीं परत कही।

अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।

अब इन जोग सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।

चाहति हुतीं गुहारि जितहिं तैं, उत तैं धार बही।

‘सूरदास’ अब धीर धरहिं क्यौं, मरजादा न लही।

उत्तर: गोपियां उधो से अपनी पीड़ा बताते हुए कह रही हैं कि जब से श्री कृष्ण गोकुल छोड़कर गए हैं तो उनकी मन की बात मन में ही रह गई है। वे इस आशा में अपने तन मन की पीड़ा को सह रही थी कि जब कृष्ण लौट कर आएंगे तो हमारे सारे दुख दूर हो जाएंगे और वे अपने प्रेम को श्री कृष्ण के समक्ष व्यक्त करेंगी और कृष्ण के प्रेम की भागीदार बनेगी परंतु कृष्ण जी ने हमारे लिए ज्ञान योग का संदेश भेज कर हमारे दुख को और बढ़ा दिया है। जब उन्हें पता चला कि श्री कृष्ण जी लौट कर नहीं आएंगे तो इस संदेश को सुनकर गोपियों टूट सी गई और उनकी बिरह की व्यथा ओर बढ़ गई और उन्हें श्री कृष्ण के रूप सौंदर्य को द्वारा निहारने का मौका अब नहीं मिलेगा। उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह अब हमेशा के लिए श्रीकृष्ण से बिछड़ चुकी हैं। इसी वजह से गोपियां वियोग में कह रही हैं कि श्रीकृष्ण ने हमारे साथ छल किया है और उन्होंने मर्यादा का उल्लंघन किया है क्योंकि लोग मर्यादा तो यह कहते है कि प्यार के बदले प्यार ही मिलना चाहिए।

3) हमारैं हरि हारिल की लकरी।

मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।

जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जक री।

सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी।

सु तौ ब्याधि हमकौ लै आए, देखी सुनी न करी।

यह तौ ‘सूर’ तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी।

उत्तर: इन पंक्तियों में गोपियां कहती हैं कि हमारे ह्रदय में कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम है जो कि किसी योग संदेश से कम होने वाला नहीं है। उनका प्रेम हारिल पक्षी की तरह है। जिस प्रकार हारिल पक्षी लकड़ी के टुकड़े को अपने जीवन का सहारा मानता है। उसी प्रकार हमने हरि को भी अपने हृदय के प्रेम रूपी पंजों से पकड़ा हुआ है और हमारे मन में केवल हरि ही रहते हैं। यहां तक कि हम सपने में, सोते हुए भी हमारा रोम रोम हरि का नाम रटता रहता हैं और इसी प्रकार हमें तुम्हारा यह योग संदेश कड़वी ककड़ी की तरह लग रहा है अर्थात इस संदेश का हमारे ऊपर कुछ असर होने वाला नहीं है। आगे गोपिया कहती हैं कि तुम यह संदेश उन्हें सुनाओ जिनका मन चंचल है और जो श्रीकृष्ण की भक्ति में न डूबा हो और शायद यह संदेश सुन कर उनका मन विचलित हो जाए पर हमारे ऊपर इस संदेश का कोई असर होने वाला नहीं है।

4) हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।

समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।

इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।

बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए।

ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।

अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।

ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।

राज धरम तौ यहै ‘सूर’, जो प्रजा न जाहिं सताए।

उत्तर: गोपियां कहती है कि श्री कृष्ण जी बचपन से ही बहुत चतुर और चालाक थे और अब वह बड़े बड़े ग्रंथ पढ़ने के बाद और भी बुद्धिमान हो गए हैं। वह उधो से कहती है कि श्री कृष्ण की चतुराई को मानना होगा कि कैसे सब कुछ जानते हुए भी उन्होंने उधो को योग के संदेश के साथ भेजा है। इसमें उधो का कोई दोष नहीं है वह तो भले लोगों का कल्याण कर के ही आनंद प्राप्त करता है। वह कहती है कि मथुरा जाते वक्त श्री कृष्ण अपने साथ साथ हमारा मन भी ले गए थे, अब हमें वह वापस चाहिए। उनके अनुसार श्रीकृष्ण अपना राज्य धर्म भी नहीं निभा रहे हैं। एक राजा का यही धर्म होता है कि वह अपनी प्रजा का ख्याल रखें, उनके सारे दुखों को नष्ट करें, किंतु यहां पर कृष्ण ही उनके दुख का कारण बन रहे हैं। इसलिए गोपियां चाहती है कि श्री कृष्ण उनके सामने आकर दर्शन दें, उन पर अत्याचार ना करें और उनके हृदय की पीड़ा को शांत करें।


कवि परिचय

सूरदास

जीवन परिचय -

महाकवि सूरदास हिन्दी की कृष्ण-भक्ति शाखा के सबसे प्रथम एवं सर्वोत्तम कवि हैं। सूरदास पहले भक्त एवं बाद में कवि हैं। भक्ति की सूरदास जैसी तन्मयता अन्य कवियों में मिलना दुर्लभ है। सूरदास ने अपने बचपन की आँखें दिल्ली के निकट सीही नामक ग्राम में सन् 1478 ई. में खोलीं। सूरदास जन्मांध थे,परन्तु उनके काव्य की सरलता एवं मधुरता को निहार कर उनके जन्मांध होने में शंका होती है। सन् 1583 ई. के लगभग,वे मृत्यु की गोद में सो गये।

प्रमुख कार्य 

  • सूरसागर,

  • साहित्य लहरी,

  • सूर सारावली। काव्यगत विशेषताएँ

कठिन शब्दो के अर्थ

  • बडभागी - भाग्यवान

  • अपसर - अछूता

  • तगा - धागा

  • पुरइन पात - कमल का पत्ता 

  • माहँ - में 

  • पाऊँ - पैर 

  • बोरयौ - डुबोया 

  • परागी - मुग्ध होना 

  • अधार - आधार 

  • आवन - आगमन 

  • बिरहिनि - वियोग में जीने वाली। 

  • हुतीं - थीं 

  • जीतहिं तैं - जहाँ से 

  • उत - उधर 

  • मरजादा - मर्यादा 

  • न लही - नहीं रही 

  • जक री - रटती रहती हैं 

  • सु - वह 

  • ब्याधि - रोग 

  • करी - भोगा 

  • तिनहिं - उनको 

  • मन चकरी - जिनका मन स्थिर नही रहता। 

  • मधुकर - भौंरा 

  • हुते - थे 

  • पठाए - भेजा 

  • आगे के - पहले के 

  • पर हित - दूसरों के कल्याण के लिए 

  • डोलत धाए - घूमते-फिरते थे 

  • पाइहैं - पा लेंगी।

प्रश्न अभ्यास

1. गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?

उत्तर: गोपियों उद्धव को भाग्यवान कहके व्यंग कसती हैं की जो मनुष्य श्री कृष्णा के साथ हमेशा रहता है, उनका सखा है भाग्यशाली है की उसे कृष्ण प्रेम का भाव नहीं पता चला है अर्थात अभागी उद्धव कृष्ण के पावन प्रेम से वंचित हैं जो कि सबसे सुन्दर अनुभूति है।

2. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?

उत्तर: उद्धव के व्यवहार की तुलना दो तरह की वस्तुओं से की गई है :

(क) कमल के पत्ते से जो पानी में रहकर भी गीला नहीं होता है छीटें तक अपने पर नहीं पड़ने देता। 

(ख) तेल में डूबी गागर से जो तेल के कारण पानी से गीली नहीं होती है अथवा उस पर पानी की एक बूंद भी नहीं टिकती।


3. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं?

उत्तर: गोपियों ने निम्नलिखित उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं ।

(क) कमल के पत्ते

(ख) प्रेम की नदी 

(ग) तेल की गगरी

गोपियाँ उलाहना करती है की उद्धव श्री कृष्ण के प्रेम में कभी डूब ही नहीं पाए, वो नदी प्रेम की जो सदैव उनके पास थी उसको उन्होंने कभाई देखा तक नहीं अर्थात कितने अभागी हैं उद्धव जो प्रेमपूर्ण कृष्ण के प्रेम से वंचित रह गए।

4. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?

उत्तर: श्रीकृष्ण के मथुरा चले जाने पर गोपियाँ पहले से विरहाग्नि में जल रही थीं। वे तत्पर श्रीकृष्ण के दर्शन का इंतज़ार कर रही थी।  वे उन्हें अपने मन की प्रीत से रूबरू कराना चाहती थी परन्तु  ऐसे में जब श्रीकृष्ण ने उद्धव से योग साधना का संदेश भिजवा दिया तथा उनको भूल जाने की बात कही तब गोपियों का ह्रदय कांच के समान चूर-चूर हो गया। जिससे उनकी व्यथा कम होने के बजाय और भी बढ़ गई । इस तरह उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेशों ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम किया।

5. ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है?

उत्तर: प्रेम की यही मर्यादा है की  प्रेमी और प्रेमिका दोनों एक दूसरे के प्रति प्रेम रखें तथा उसे निभाए। वे प्रेम की सच्ची भावना को समझें और उसकी मर्यादा की रक्षा करें परंतु यहाँ श्री कृष्ण ने गोपियों के प्रेम को ठेस पहुंचाई है उन्हें योग-संदेश भेज के। उन्होंने प्रीत निभाने की बजाय उनके लिए नीरस योग-संदेश भेज दिया, जो कि एक छलावा था, भटकाव था। इसी छल को गोपियों ने मर्यादा का उल्लंघन कहा है।


6. कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?

उत्तर: गोपियों ने कृष्ण के प्रति अपनी अनन्य भक्ति की अभिव्यक्ति निम्नलिखित रूपों में की है :

(क) वे अपनी स्थिति गुड़ से चिपटी चींटियों जैसी पाती हैं जो किसी भी दशा में कृष्ण प्रेम से दूर नहीं रह सकती हैं।

(ख) वे श्रीकृष्ण और अपने प्रेम को हारिल की लकड़ी के समान मानती हैं।

(ग) वे श्रीकृष्ण के प्रति मन-कर्म और वचन से समर्पित हैं।

(घ) उन्हें कृष्ण प्रेम के आगे योग संदेश कड़वी ककड़ी जैसा लगता है।

()  वे सोते-जागते, दिन-रात कृष्ण का जाप करती हैं।

7. गोपियों ने उधव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?

उत्तर: गोपियों उद्धव से कहती है की वे योग की शिक्षा ऐसे लोगों को दें जिनके मन स्थिर नहीं अर्थात चंचल हैं। जिन्होंने कृष्ण प्रेम की अनुभूति नहीं की हो क्यूंकि वे ही योग करने में सक्षम है, हमे तो कृष्ण प्रीत प्राप्त है हमे योग कहा भायेगा।


8. प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।

उत्तर: सूरदास द्वारा रचित इन पदों में गोपियों की कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ प्रेम, भक्ति, आसक्ति और स्नेहमयता प्रकट हुई है। गोपियों पर श्रीकृष्ण के प्रेम का ऐसा रंग चढ़ा है कि खुद कृष्ण का भेजा योग संदेश कड़वी ककड़ी और योग व्याधि के समान लगता है, जिसे वे किसी भी दशा में अपनाने को तैयार नहीं हैं।


9. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?

उत्तर: गोपियों के अनुसार, राजा का धर्म होना चाहिए कि वह प्रजा को अन्याय से बचाए। उन्हें सताए जाने से रोके अर्थात सुखी रखे।


10. गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन-से परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं?

उत्तर: गोपियों को कृष्ण में ऐसे अनेक परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन श्रीकृष्ण से वापस पाना चाहती हैं; जैसे

(क) श्रीकृष्ण अब राजनीति का पाठ कर चुके हैं  जिसके कारण उनके व्यवहार में परिवर्तन आया है।

(ख) वे अब प्रेम की मर्यादा पालन नहीं कर रहे हैं।

(ग) श्रीकृष्ण अब राजधर्म भूलते जा रहे हैं और वे अपनी प्रजा को सुखी नहीं रख रहे हैं। 

(ड) दूसरों को अत्याचार से छुड़ाने वाले श्रीकृष्ण अब स्वयं अनीति पर उतर आए हैं और योग-सन्देश भेज कर हमारे प्रीत का अपमान किये जा रहे हैं।


11. गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य के आधार पर ज्ञानी उद्धव को परास्त कर दिया, उनके वाक्चातुर्य की विशेषताएँ लिखिए?

उत्तर: गोपियाँ वाक्चतुर हैं। वे बात बनाने में माहिर हैं । यहाँ तक कि ज्ञानी उद्धव उनके सामने गैंगे होकर खड़े रह जाते हैं। जिस प्रकार वे अपनी  प्रीती को बचाने के लिए उद्धव को बातें सुनाती हैं उनकी उलाहना कर, उनकी तुलना कमल के पत्ते, तेल की गागर से करती हैं  यह दर्शाता है उनका प्रेम श्री कृष्ण के लिए। यही आवेग उद्धव की बोलती बंद कर देता है। सच्चे प्रेम में इतनी शक्ति है कि बड़े-से-बड़ा ज्ञानी भी उसके सामने घुटने टेक देता है।


12. संकलित पदों को ध्यान में रखते हुए सूर के भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएँ बताइए?

उत्तर: सूरदास के पदों के आधार पर भ्रमरगीत की कुछ विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :

(क) पदों में गेयता और संगीतात्मकता का गुण है।

(ख) इस गीत में सगुण ब्रह्म की सराहना है।

(ग) इसमें गोपियों के माध्यम से उपालंभ, वाक्पटुता, व्यंग्यात्मकता का भाव मुखरित हुआ है।

(घ) उद्धव के ज्ञान पर गोपियों के वाक्चातुर्य और प्रेम की विजय का चित्रण है।

(य) सूरदास के भ्रमरगीत में विरह व्यथा का मार्मिक वर्णन है।

(र) गोपियों का कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ प्रेम का प्रदर्शन है।


रचना और अभिव्यक्ति

13. गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए।

उत्तर: कुछ ऐसे तर्क दिऐ जा सकते है। जैसे की:

(1) कृष्ण ने तो हमसे मिलने का वादा किया था। ना ही उन्होंने प्रेम धर्म निभाया और ना ही राजधर्म।

(2) हम गोपियां तो केवल सच्चा प्रेम करना जानती है इसलिए हमें योग साधना का संदेश देना बिल्कुल उचित नहीं है।

(3) योग संदेश कृष्ण कुब्जा को क्यों नहीं देते अगर वह इतना ही प्रभावशाली है। और यह बताओ कि जिसकी जुबान पर कृष्ण का मीठा रस चढ़ गया हो वह योग जैसे कठिन मार्ग का संदेश क्यों सुनेगा व करेगा।

(4) याेग का मार्ग गोपियों के बस की बात नहीं है क्योंकि गोपियों का शरीर कोमल और मन मधुर है। यह कठोर साधना गोपियों के कर पाने की बात नहीं है।

14. उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे; गोपियों के पास ऐसी कौन-सी शक्ति थी जो उनके वाक्चातुर्य में मुखरित हो उठी?

उत्तर: उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे परंतु उन्हें व्यावहारिकता का अभाव था जिसका उपयोग गोपियों ने किया और कहा कि उद्धव को श्रीकृष्ण से अनुराग नहीं हो सका, इसलिए उन्होंने कहा था, ‘प्रीति नदी में पाउँ न बोरयो’ जिसका उत्तर उद्धव नहीं दे पाए थे। गोपियाँ कृष्ण के प्रति असीम, अनंत लगाव रखती थी। जबकि उद्धव को प्रेम जैसी भावना से कोई मतलब न था। उद्धव को इस स्थिति में चुप देखकर उनकी वाक्चातुर्य और भी मुखर हो उठी।

15. गोपियों ने यह क्यों कहा कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं? क्या आपको गोपियों के इस कथन का विस्तार समकालीन राजनीति में नज़र आता है, स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: श्री कृष्ण मथुरा के राजा बन जाते हैं और वृन्दावन छोड़ देते हैं परन्तु उन्हें प्रेम करने वाली गोपियाँ पीछे ही छूठ जाती हैं। गोपियाँ विरह में श्री कृष्ण के वापिस आने की लम्बी प्रतीक्षा करती हैं परन्तु उनकी जगह उनका दूत आता है जो कि कृष्ण से दूर ले जाने वाला योग-संदेश लाता है तो उन्हें इसमें कृष्ण की एक चाल नज़र आती है। वे इसे अपने साथ छल समझने लगती हैं। इसीलिए उन्होंने आरोप लगाया कि “हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।”


आज की राजनीति तो सिर से पैर तक छल-कपट से भरी हुई है। किसी को किसी भी राजनेता के वायदों पर विश्वास नहीं रह गया है। नेता बातों से नदियाँ, पुल, सड़कें और न जाने क्या-क्या बनाते हैं किंतु जनता लुटी-पिटी-सी नजर आती है। आज़ादी के बाद से गरीबी हटाओ का नारा लग रहा है किंतु तब से लेकर आज तक गरीबों की कुल संख्या में वृद्धि ही हुई है। इसलिए गोपियों का यह कथन समकालीन राजनीति पर खरा उतरता है।


Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 Explanation

Kshitij Class 10 Chapter 1 is the best option to score well in Hindi paper in board exams. A student needs a trustworthy guide for referring to exams, and NCERT has been renowned for its quality solutions.

Teachers recommend their students NCERT textbooks and solutions as they are written according to CBSE pattern, making it apt for competitive exams and higher studies. Moreover, these NCERT solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 give utmost importance to grammar and meaning, which is necessary for exams.

Class 10 Kshitij Chapter 1 pdf available on this page makes a smarter choice for the students to study.

CBSE Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1

There are ideally fourteen questions in the NCERT solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1, which are theoretical in answer. These solutions are elaborative and give a brief explanation of the poetry by Surdas. Take a look.

Q1. Class 10 Hindi Kavya Khand Chapter 1 

Solution: This first question requires a student to write the meaning of the lines from the first stanza “Uddhav tum ho... gud chati jo pagi”.

Q2. Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 

Solution: The second question from NCERT solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 requires students to explain the lines “maan ki maan ... marjad na rahi”. They have to find the satire behind this conversation.

Q3. Ch 1 Hindi Class 10 Kshitij 

Solution: “Hamare hari haril ki lakdi... jinke maan chakri”, these lines from Surdas’s poetry need to be explained by students.

Q4. Hindi Class 10 Kshitij Chapter 1

Solution: This fourth question asks students to give the meaning behind the lines “Hari ki rajniti padhi aye...jo Praja na Jahi sataye”. This conversation or taunt by gopis has to be explained by students.

Q5. NCERT Solution of Class 10 Hindi Kshitij

Solution: This fifth question requires students to write about Surdas and give a meaning of words like badbhagi, upraas, huti, birhin, avan, etc.

 

Q6. Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 Solutions

Solution: This question from NCERT solutions for Class 10 Hindi Kshitij chapter 1 requires a student to answer why gopis call Udhav Bhagyawan or lucky. 

 

Q7. Class 10th Hindi Kshitij Chapter 1

Solution: This seventh question requires young learners to answer with who is Uddhav’s behaviour compared and how gopis tried to overthrow him with words.

Q8. Ch 1 Kshitij Class 10

Solution: How does Uddhav’s suggestion on yog give rise to gopi’s despair? It needs to be explained by students in this question.

Q9. Class 10th Kshitij Chapter 1

Solution: ‘Maryada na lahi’, students need to explain this line and how modesty is related to the conversation.

Q10. NCERT Solutions Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1

Solution: Students in the tenth question have to explain how gopis show their desire for Krishn’s love in the poem.

Q11. NCERT Solution for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1

Solution: In this question, students have to answer the suggestion gopis give to Uddhav about yog and the teachings.

Q12. NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kavya Khand

Solution: Based on the poem, young learners have to explain the yoga-practice by gopis and its importance.

Q13. CBSE Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 Solutions

Solution: Thirteenth question requires students to answer what according to the gopis is dharma.

Q14. Class 10th Hindi Kavya Khand

Solution: This question requires students to answer what changes did the gopis notice in Krishna that they want to win him over again.

Apart from these fourteen questions, there are three more questions in NCERT solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1, which are based on this conversation between gopis and messenger. Students have to explain the concepts and the inert meaning for scoring well in board exams.

Advantage of NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kavya Khand Chapter 1

Every student preparing for tenth boards must get an impressive score to secure admission in good schools and universities. Language is one such easiest way to rank better without much effort, NCERT solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 1 are the best option to achieve this goal.

Here are some benefits of reading NCERT solutions for board preparation:

  • Easy and lucid language for a better explanation of chapter and poems.

  • In-text and external exercises specifically designed to expand the knowledge of class 10 students.

  • Quality study materials prepared under the expert direction for offering students a mark fetching answer pattern.

  • A clear explanation of underlying meaning with examples.

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NCERT Class 10 Hindi Kshitij Chapterwise Solutions

 

Along with this, students can also view additional study materials provided by Vedantu, for Class 10 

FAQs on NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 1 - Surdas Ke Pad

1. What are the Essential Chapters in Class 10 Kshitij?

For all-round development, a student needs to give equal importance to all the chapters. Hindi is a subject which requires an understanding of in-between lines for swift answering during exams.


Some of the chapters one can give more value are Kavya Khand, Tulsidas, Nagarjun, Rituraj, Balgobi Bhagat, Naubatkhane mein Ibadat and Sanskruti. These chapters need thorough reading for in-depth understanding.


To clear doubts, a student can refer to the NCERT solution for Kshitij and prepare their notes accordingly. Moreover, Sites like Vedantu offer notes and online classes designed to clear the doubts related to literature and related subjects.

2. Who is the Poet of the Kshitij Chapter 1?

Kavya Khand from Kshitij book was written by a 16th-century blind poet Surdas who was born 1478 near Mathura. He was a disciple of Mahaprabhu Vallabhacharya and was known as one of the octagon poets who wrote in Braj language.


Sursagar, Sahitya Lahari and Sur Saravali are some of the books written by Surdas which speaks about farming and nature. Surdas is known for Vatsalya and Shringar Ras poems. The poems are mostly based on romance and satire between Radha and Krishna. This chapter from Kshitij is based on chedkhani or flirting between gopis and messenger Uddhav.

3. Where can I Find the NCERT Solution for Kshitij Chapter 1?

Kshitij belongs to CBSE syllabus, which follows the NCERT planned education system. A student can easily find the NCERT solution for Hindi texts at online education portals like Vedantu.


These solutions are written under expert supervision and follow a mark scoring pattern. A student can easily download them in PDF format and study at their convenience for free. Apart from the solution, a student can also find notes and live classes on different subjects and chapters in this education portal for a minimum price.

4. What is Chapter 1 in Kshitij of Class 10 about?

The chapter is a collection of ‘pad’ by Surdas. They are taken from the larger collection of pads written by Surdas called ‘Sursagar’. The pads talk about Sri Krishna and how he isn't able to reach back to Mathura and so he tells Udhav to take this message to his beloved ‘gopis’. The pads a description of his conversation with the gopis and how they react to the news. They declare their undying love and loyalty to Sri Krishna. 

5. Explain the first pad of Chapter 1 of Class 10 Kshitij?

The first pad talks about the love gopis have for Sri Krishna. They tell Udhav that he is lucky that he hasn't fallen in love with Sri Krishna and his charm yet. They say that even after being so close with him he has not been able to be charmed by him. They compare him to the lotus leaf that even though it stays so close to water, it manages to stay afloat on it.  On the other hand, the gopis are so mesmerised and in love with Sri Krishna that they cannot see beyond it. 

6. How can I prepare Chapter 1 of Kshitij Class 10 Hindi?

Hindi is an important language to study and prepare for. Many students feel like it is a tough subject. If the students practice and learn and write Hindi questions and answers for the exam, it would be much easier for them to memorise it and make fewer errors while writing as well. You can also refer to the solutions pdf provided by Vedantu online to understand the answers and summary of the chapter easily. 

7. Explain the second pad of Chapter 1 of Class 10 Kshitij?

In this pad, the poet is explaining what the gopis are feeling once they have received the news on Sri Krishna not returning to Mathura. They feel betrayed by him. They feel restless and impatient. They feel like he has broken a promise to them. They are sad that they will never be able to meet or see him again and admire his charisma and beauty. They feel like they have lost him forever. 

8. What are the important questions to prepare for this chapter?

The pads are written by Surdas and are only a few from his larger collection called Sursagar. It is important that the students completely understand the meaning of the pads to be able to attempt all the questions properly and prepare for the exam. The students should also prepare and practice all the questions from the NCERT textbook. For solved Vedantu NCERT questions and extra practice questions, they can refer to the Class 10 Hindi Chapter 1 Solutions pdf online. Students can also use the Vedantu app for accessing the solutions which are available free of cost.