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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 Mai Aur Mera Desh (2026-27)

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Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश Questions and Answers FREE PDF

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 Main Aur Mera Desh help students understand the chapter’s themes of patriotism, national identity, social responsibility, and citizens' duties. Vedantu’s Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश Questions and Answers provide simple, accurate, and well-structured solutions to all textbook questions. Students can use the FREE PDF for homework, answer-writing practice, quick revision, and effective preparation for the 2026-27 CBSE examinations.

Class 9 Ganga Chapter 7 Question Answer – Hindi मैं और मेरा देश NCERT Solutions

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

प्रश्न 1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?

(क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
(ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार
(घ) सुख-सुविधाओं का अभाव

उत्तर: (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार

तर्क: लेखक अपने घर, पड़ोस और नगर से प्राप्त प्रेम, सहयोग और ज्ञान के कारण स्वयं को पूर्ण मानता था। लाला लाजपत राय के अनुभव ने उसकी इस धारणा को तोड़ दिया। इसलिए ‘दरार’ लेखक के पूर्णता के भाव पर हुए प्रहार की ओर संकेत करती है।


प्रश्न 2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?

(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का
(ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
(ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
(घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का

उत्तर: (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का

तर्क: लेखक को ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो किसी विचार को खोलने, समझाने और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।


प्रश्न 3. “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में-

(क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
(ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
(घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।

उत्तर: (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

तर्क: पराधीनता के कारण भारतीयों को स्वतंत्रता, सम्मान और अपने विषय में निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त नहीं था। विदेशी शासन उनके आत्मसम्मान और राष्ट्रीय गौरव को दबाता था।


प्रश्न 4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि-

(क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
(ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।

उत्तर: (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

तर्क: यदि किसी व्यक्ति का देश पराधीन है, तो उसकी निजी उपलब्धियाँ और साधन भी उसे पूर्ण सम्मान नहीं दिला सकते। पराधीनता का कलंक विदेश में भी उसके गौरव को प्रभावित करता है।


प्रश्न 5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?

(क) देश और नागरिक
(ख) देश और संविधान
(ग) देश और विदेश
(घ) व्यवसाय और आजीविका

उत्तर: (क) देश और नागरिक

तर्क: निबंध में व्यक्ति और उसके देश के अटूट संबंध को समझाया गया है। नागरिक के अच्छे या बुरे कार्यों का प्रभाव उसके देश की प्रतिष्ठा पर भी पड़ता है।


प्रश्न 6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?

(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
(ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
(घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा

उत्तर: (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध

तर्क: निबंध का मुख्य विचार यह है कि नागरिक और देश एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। नागरिक का सम्मान देश से और देश का गौरव उसके नागरिकों के आचरण से जुड़ा होता है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

प्रश्न 1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

उत्तर: स्वामी रामतीर्थ जापानी युवक का उत्तर सुनकर इसलिए मुग्ध हो गए क्योंकि उसके शब्दों में अपने देश के प्रति गहरा प्रेम और गौरव झलक रहा था। युवक नहीं चाहता था कि स्वामी रामतीर्थ अपने देश लौटकर यह कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। उसके इस व्यवहार से एक जिम्मेदार और देशभक्त नागरिक की भावना प्रकट हुई।


प्रश्न 2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

उत्तर: जापानी युवक ने फलों के मूल्य के रूप में स्वामी रामतीर्थ से केवल यह माँगा कि वे अपने देश जाकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।

इस घटना से उस युवक की छवि एक देशभक्त, स्वाभिमानी, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक के रूप में उभरती है। वह अपने छोटे-से कार्य के माध्यम से अपने देश की प्रतिष्ठा की रक्षा करना चाहता था।


प्रश्न 3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: व्यक्ति और देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं। नागरिकों के अच्छे कार्यों से देश का सम्मान बढ़ता है, जबकि उनके अनुचित आचरण से देश की छवि धूमिल होती है।

उदाहरण के लिए, जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ को फल देकर अपने देश का गौरव बढ़ाया। इसके विपरीत, एक विदेशी विद्यार्थी ने जापान के पुस्तकालय की पुस्तक से दुर्लभ चित्र चुरा लिए। उसके अपराध का प्रभाव केवल उसी पर नहीं पड़ा, बल्कि उसके पूरे देश के नागरिकों को पुस्तकालय में प्रवेश से वंचित कर दिया गया। इससे स्पष्ट है कि नागरिक का व्यवहार उसके देश की पहचान बन जाता है। इसलिए व्यक्ति और देश को अलग नहीं माना जा सकता।

मेरे अनुभव मेरे विचार

प्रश्न 1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि देश और उसके नागरिकों का सम्मान एक-दूसरे से जुड़ा होता है। जब किसी देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतते हैं, वैज्ञानिक महत्वपूर्ण खोज करते हैं या नागरिक विदेशों में अच्छा व्यवहार करते हैं, तो पूरे देश का गौरव बढ़ता है।

इसके विपरीत, यदि कोई नागरिक विदेश में चोरी, धोखाधड़ी या अनुशासनहीनता करता है, तो उसके व्यवहार के कारण उसके देश के अन्य नागरिकों के प्रति भी नकारात्मक धारणा बन सकती है। इस प्रकार देश के गौरव का लाभ उसके नागरिकों को और नागरिकों के आचरण का परिणाम उनके देश को मिलता है।


प्रश्न 2. “मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”

(क) प्रातः काल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।

उत्तर:

सुबह से रात तक मैं अनेक लोगों का सहयोग लेता हूँ। माता-पिता मुझे समय पर उठाते हैं, भोजन तैयार करते हैं और विद्यालय जाने में सहायता करते हैं। वाहन चालक मुझे विद्यालय पहुँचाता है। अध्यापक पढ़ाई में मार्गदर्शन करते हैं। विद्यालय के चौकीदार, सफाई कर्मचारी, पुस्तकालयाध्यक्ष और अन्य कर्मचारी भी मेरे दैनिक जीवन को व्यवस्थित बनाते हैं।

मैं भी घर के छोटे-मोटे कार्यों में माता-पिता की सहायता करता हूँ। विद्यालय में अनुशासन बनाए रखता हूँ, सहपाठियों के साथ अपनी अध्ययन सामग्री साझा करता हूँ और अनुपस्थित मित्रों को गृहकार्य भेजता हूँ। आवश्यकता पड़ने पर छोटे बच्चों और वृद्ध लोगों की भी सहायता करता हूँ।


(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर: ‘बहुतों’ में माता-पिता, भाई-बहन, पड़ोसी, मित्र, अध्यापक, वाहन चालक, दुकानदार, किसान, दूधवाला, सफाई कर्मचारी, डॉक्टर, माली, डाक कर्मचारी, पुलिसकर्मी और समाज के अन्य सहयोगी लोग सम्मिलित हो सकते हैं।


(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।

उत्तर: रचनाकार को पाठकों, श्रोताओं, संपादकों, प्रकाशकों, मुद्रकों, वितरकों, आलोचकों और साहित्यिक साथियों के सहयोग की आवश्यकता होती है। पाठकों की प्रतिक्रिया और आलोचकों के सुझाव उसे अपनी रचनाओं को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं।

रचनाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करता है, उन्हें ज्ञान देता है और समाज की समस्याओं के प्रति जागरूक बनाता है। वह पीड़ितों और वंचितों की आवाज बनकर सामाजिक परिवर्तन में भी योगदान देता है।


प्रश्न 3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”

(क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए अपने घर या पास-पड़ोस के बड़ों और अध्यापक से चर्चा करके लिखिए।

उत्तर: युद्ध में केवल सैनिकों का लड़ना ही महत्वपूर्ण नहीं होता। उनके पीछे भोजन, चिकित्सा, संचार, यातायात और आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था करने वाले लोगों का योगदान भी उतना ही आवश्यक होता है।

देश की प्रगति, विकास और सुरक्षा के प्रति हमारे प्रमुख दायित्व हैं—

  • देश के कानूनों और नियमों का पालन करना।

  • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना।

  • स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखना।

  • ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना।

  • सैनिकों और सुरक्षा कर्मियों का सम्मान करना।

  • आवश्यकता पड़ने पर राहत और सेवा कार्यों में भाग लेना।

  • एनसीसी, स्काउट और सामाजिक सेवा कार्यक्रमों से जुड़ना।

  • देश की एकता, शांति और सद्भाव बनाए रखना।

  • अफवाहों और देशविरोधी गतिविधियों से दूर रहना।

  • अपने कार्य द्वारा देश की प्रगति में योगदान देना।


(ख) अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं?

(संकेत – आप अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी ‘दो बैलों की कथा’ के मुख्य पात्रों के अनुभवों को भी आधार बना सकते हैं।)

उत्तर: पशु-पक्षियों का जीवन निरंतर संघर्ष से भरा होता है। उन्हें भोजन, पानी, आश्रय और सुरक्षा के लिए स्वयं प्रयास करना पड़ता है। गर्मी, सर्दी, वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के बीच उन्हें खुले वातावरण में रहना पड़ता है।

मानवीय गतिविधियों के कारण उनके घोंसले और प्राकृतिक आवास नष्ट होते हैं। कई बार उन्हें भूख, प्यास, दुर्घटनाओं और क्रूर व्यवहार का सामना करना पड़ता है। ‘दो बैलों की कथा’ के हीरा और मोती की तरह अनेक पशु भी बंधन, अत्यधिक श्रम और भोजन की कमी सहते हैं। हमें उनके प्रति संवेदनशील रहकर भोजन, पानी और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए।


(ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।

उत्तर: निबंध में जीवन को युद्ध इसलिए कहा गया है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं, जिम्मेदारियों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है। जीवन में सफलता बिना परिश्रम, धैर्य और कठिनाइयों का सामना किए प्राप्त नहीं होती।

किसान फसल उगाने के लिए मौसम से संघर्ष करता है, श्रमिक आजीविका के लिए मेहनत करता है, विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने के लिए नियमित अध्ययन करता है और सरकार को नागरिकों की सुरक्षा तथा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए जीवन का प्रत्येक क्षेत्र संघर्ष, साहस और सहयोग की माँग करता है।


(घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?

उत्तर: हमारे जीवन को बेहतर बनाने में अनेक लोगों का योगदान होता है—


सहयोगी व्यक्ति

उनका योगदान

हम क्या कर सकते हैं?

शिक्षक

हमें शिक्षा और मार्गदर्शन देते हैं।

उनका सम्मान करें और मन लगाकर पढ़ें।

डॉक्टर

हमारे स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं।

उनके निर्देशों का पालन करें।

किसान

हमारे लिए अन्न, फल और सब्जियाँ उगाते हैं।

अन्न का सम्मान करें और उसे व्यर्थ न करें।

सफाई कर्मचारी

आसपास की स्वच्छता बनाए रखते हैं।

कूड़ा कूड़ेदान में डालें और उसका सम्मान करें।

वाहन चालक

हमें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं।

यातायात नियमों का पालन करें।

दुकानदार

आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं।

ईमानदारी से भुगतान करें और विनम्र व्यवहार करें।

श्रमिक

भवन, सड़क और अन्य सुविधाओं का निर्माण करते हैं।

उनके श्रम और अधिकारों का सम्मान करें।

पुलिसकर्मी

कानून-व्यवस्था बनाए रखते हैं।

नियमों का पालन करें और आवश्यकता पर सहयोग करें।

कलाकार

हमारा मनोरंजन करते हैं और संस्कृति को समृद्ध बनाते हैं।

उनकी कला और परिश्रम का सम्मान करें।



प्रश्न 4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”

(क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?

उत्तर: लेखक के परिवार और पड़ोसियों के बीच प्रेम, विश्वास, सहयोग और अपनत्व के संबंध रहे होंगे। पड़ोसी बच्चों को अपने परिवार का सदस्य मानते होंगे और आवश्यकता पड़ने पर एक-दूसरे की सहायता करते होंगे। तभी लेखक को पड़ोस में खेलने और वहाँ के लोगों का ममता-दुलार प्राप्त करने का अवसर मिला।


(ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।

उत्तर: वर्तमान समय में पड़ोसियों के बीच पहले जैसी निकटता और नियमित मेल-जोल कुछ कम हुआ है। लोग अपने काम, पढ़ाई और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों में अधिक व्यस्त रहते हैं। संयुक्त परिवारों के स्थान पर छोटे परिवार बढ़ने, शहरों में लगातार स्थान बदलने और डिजिटल साधनों पर अधिक समय बिताने के कारण भी पड़ोसियों के बीच संवाद कम हुआ है।

फिर भी सहयोग, सम्मान और नियमित बातचीत के माध्यम से पड़ोसियों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखे जा सकते हैं।


प्रश्न 5. “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?

उत्तर: हम घर, विद्यालय और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए कूड़ा केवल कूड़ेदान में डालते हैं। टॉफी और खाद्य पदार्थों के रैपर सड़क पर नहीं फेंकते तथा दूसरों को भी ऐसा न करने के लिए प्रेरित करते हैं।

हम विद्यालय के फर्नीचर, दीवारों, पुस्तकालय की पुस्तकों और अन्य सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाते। ऐतिहासिक स्थानों की दीवारों पर नाम नहीं लिखते और वहाँ लगे नियमों का पालन करते हैं। समय-समय पर स्वच्छता अभियान में भाग लेकर आसपास के वातावरण को सुंदर बनाए रखने में सहयोग देते हैं।


प्रश्न 6. “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें? अपने-अपने समूह में इसकी चर्चा कीजिए और चर्चा से उभरे बिंदुओं को प्रातःकालीन सभा में पढ़कर सुनाइए।

उत्तर:

क्या करें?

  • देश के संविधान और कानूनों का पालन करें।

  • राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करें।

  • सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखें।

  • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें।

  • सभी धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान करें।

  • ईमानदारी और जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करें।

  • पुस्तकालय की पुस्तकों और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा करें।

  • सत्य, अनुशासन और सद्भाव का पालन करें।

क्या न करें?

  • देश या समाज के विरुद्ध झूठी अफवाहें न फैलाएँ।

  • सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फेंकें।

  • पुस्तकालय की पुस्तकों के पृष्ठ न फाड़ें।

  • सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाएँ।

  • जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर भेदभाव न करें।

  • अपशब्दों और हिंसक व्यवहार का प्रयोग न करें।

  • देशविरोधी या गैर-कानूनी गतिविधियों में भाग न लें।


मेरे प्रश्न 

“ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।”

निबंध के उपर्युक्त संदर्भ से आपके लिए दो प्रश्न बनाए गए हैं-

(क) रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?

उत्तर: रचनाकार को ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो किसी विचार को विस्तार से समझाने, उसके छिपे हुए अर्थ को खोलने और विषय को आगे बढ़ाने का अवसर देते हैं।


(ख) आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?

उत्तर: मुझे ऐसे प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है जिनमें तर्क, कल्पना, रहस्य और जीवन से जुड़ी समस्याओं का समाधान छिपा हो। ऐसे प्रश्न सोचने, नए विचार खोजने और अपनी समझ को विकसित करने का अवसर देते हैं।

अब इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए।

यह सोचना एकदम निराधार है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं। देश की सुरक्षा का विषय हो अथवा ऐश्वर्य व संपन्नता का, सभी नागरिकों का अपनी ही तरह से योगदान होता है। हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम यदि कुछ भी गलत करते हैं तो उससे अपनी छवि ही धूमिल नहीं होती अपितु अपने देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

उत्तर:

  1. क्या केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं?

  2. एक सामान्य नागरिक अपने देश की सुरक्षा और समृद्धि में किस प्रकार योगदान दे सकता है?

  3. किसी नागरिक के गलत आचरण का उसके देश की छवि पर क्या प्रभाव पड़ता है?


विधा से संवाद

आपने अब तक अपनी पाठ्यपुस्तकों और अन्य पुस्तकों में बहुत से निबंध पढ़े होंगे और लिखे भी होंगे। निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं? आइए, इस विधा से संबंधित कुछ विचार-विमर्श करते हैं-

प्रश्न 1. ‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘बाँधना’ (नि+बंध)। अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं। एक विधा के रूप में निबंध की कुछ विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-


निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘बाँधना’ (नि+बंध)। अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं। एक विधा के रूप में निबंध की कुछ विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-


उपर्युक्त बिंदुओं से संबंधित संदर्भ ‘मैं और मेरा देश’ निबंध से खोजकर लिखिए।

उत्तर:

निबंध की विशेषता

‘मैं और मेरा देश’ से उदाहरण

वैयक्तिकता

“मैं अपने घर में जन्मा था, पला था।”

विचार-प्रधानता एवं भावनात्मकता

लेखक अपने घर, पड़ोस और नगर में पूर्णता अनुभव करने के बाद देश की पराधीनता से उत्पन्न हीनता पर विचार करता है।

सजीवता एवं चित्रात्मकता

“क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं, अपने घर का कूड़ा बाहर फेंकते हैं…?”

तार्किकता

लेखक तर्क देता है कि नागरिक और देश अलग नहीं हैं। दोनों का सम्मान और गौरव परस्पर जुड़ा है।

प्रेरणात्मकता

लेखक नागरिकों को सही व्यक्ति को मत देने और देश के सम्मान की रक्षा करने के लिए प्रेरित करता है।

संक्षिप्तता एवं स्पष्टता

“युद्ध में जय बोलने वालों का भी बहुत महत्व है।”

साहित्यिक सौंदर्य

“मानस में भूकंप उठा था… एक तेजस्वी पुरुष का अनुभव ही वह भूकंप था, जिसने मुझे हिला दिया।”

विषय-केंद्रीयता

निबंध का प्रत्येक उदाहरण व्यक्ति और देश के अटूट संबंध को स्पष्ट करता है।



प्रश्न 2.

“क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई?

बड़े महत्व का प्रश्न है। इस अर्थ में भी कि यह बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है और इस अर्थ में भी कि ठीक समय पर पूछा गया है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है, तो उत्तर यह है आपके प्रश्न का…।”

निबंध के उपर्युक्त अंश को ध्यान से देखिए। इसकी पहली पंक्ति में एक प्रश्न है और बाद के अंश में उसका उत्तर दिया गया है। आपने ध्यान दिया होगा कि यह पूरा निबंध इसी तरह की प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है। यह प्रश्नोत्तर या संवादात्मक शैली इस निबंध की संरचना को विशेष बनाती है। इसी तरह की और भी अन्य विशेषताएँ इस निबंध में से छाँटकर लिखिए।

उत्तर:

निबंध की अन्य प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  • संवादात्मक एवं प्रश्नोत्तर शैली

  • विवेचनात्मक शैली

  • उदाहरण-प्रधान शैली

  • चित्रात्मक शैली

  • प्रेरणात्मक एवं उपदेशात्मक शैली

  • तर्कपूर्ण भाषा

  • मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग

  • सरल, रोचक और प्रभावशाली प्रस्तुति

  • ऐतिहासिक और वास्तविक घटनाओं का समावेश


प्रश्न 3. नीचे कुछ विषय दिए गए हैं, आप इनमें से किन विषयों पर निबंध लिखना चाहेंगे, कारण सहित लिखिए-


नीचे कुछ विषय दिए गए हैं, आप इनमें से किन विषयों पर निबंध लिखना चाहेंगे, कारण सहित लिखिए


  • मेरा भारत मेरा गौरव

  • चाँद के साथ गपशप

  • जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि

  • गागर में सागर

  • यथा नाम तथा गुण

  • दूध का दूध और पानी का पानी

उत्तर:

मैं ‘मेरा भारत मेरा गौरव’ विषय पर निबंध लिखना चाहूँगा।

भारत का इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, साहित्य, कला, योग, दर्शन और विविधता अत्यंत समृद्ध हैं। मैं निबंध के माध्यम से भारत की उपलब्धियों, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और देशवासियों की एकता का वर्णन करना चाहूँगा। इससे पाठकों में अपने देश के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।


विषयों से संवाद

चुनाव एवं आपके अनुभव

“क्या कोई ऐसी कसौटी भी बनाई जा सकती है, जिससे देश के नागरिकों को आधार बनाकर देश की उच्चता और हीनता को हम तोल सकें?”

रचनाकार के अनुसार इस प्रश्न का उत्तर है—निष्पक्ष चुनाव-प्रक्रिया।

प्रश्न 1.

जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?

उत्तर:

चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर निम्नलिखित गतिविधियाँ होती हैं—

  1. मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है।

  2. विभिन्न दल और स्वतंत्र उम्मीदवार अपने नामांकन-पत्र भरते हैं।

  3. उम्मीदवार जनसभाएँ, रैलियाँ और घर-घर संपर्क के माध्यम से प्रचार करते हैं।

  4. चुनाव घोषणापत्र और विकास से जुड़े मुद्दे जनता के सामने रखे जाते हैं।

  5. चुनाव आयोग मतदान केंद्रों और मतदान अधिकारियों की व्यवस्था करता है।

  6. मतदान के दिन मतदाता अपना मत देते हैं।

  7. मतदान के बाद मतगणना होती है।

  8. सबसे अधिक मत पाने वाले उम्मीदवार को विजयी घोषित किया जाता है।


प्रश्न 2. “जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें”, आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?

उत्तर: एक अच्छा उम्मीदवार ईमानदार, शिक्षित, संवेदनशील, जिम्मेदार और जनसेवा के प्रति समर्पित होना चाहिए। उसे जनता की समस्याओं की जानकारी होनी चाहिए और सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। वह अपने वचनों को पूरा करने वाला, भ्रष्टाचार से दूर, निडर और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने वाला होना चाहिए।


प्रश्न 3. चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए।

(संकेत – विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)

उत्तर: हमारी कक्षा में कक्षा-प्रतिनिधि का चुनाव आयोजित किया गया। दो विद्यार्थियों ने अपना नाम प्रस्तुत किया। दोनों ने कक्षा की समस्याओं को हल करने और विद्यार्थियों की बात अध्यापकों तक पहुँचाने का वचन दिया।

मतदान गुप्त रूप से कराया गया। सभी विद्यार्थियों ने अपनी समझ के अनुसार मत दिया। मतगणना के बाद सबसे अधिक मत पाने वाले विद्यार्थी को कक्षा-प्रतिनिधि चुना गया। इस अनुभव से मैंने सीखा कि उम्मीदवार का चुनाव केवल मित्रता या लोकप्रियता के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी योग्यता, ईमानदारी और जिम्मेदारी देखकर करना चाहिए।


प्रश्न 4. यदि आप किसी सभा, क्लब आदि के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या-क्या मुद्दे होंगे?

उत्तर: यदि मैं किसी साहित्यिक सभा का उम्मीदवार बनूँ, तो मेरे प्रमुख मुद्दे होंगे—

  • प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देना।

  • साहित्यिक कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाना।

  • कविता, कहानी, निबंध और भाषण प्रतियोगिताएँ आयोजित करना।

  • नई साहित्यिक प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें मंच प्रदान करना।

  • विद्यालय की पत्रिका नियमित रूप से प्रकाशित करवाना।

  • पुस्तकालय में उपयोगी और रोचक पुस्तकों की संख्या बढ़ाना।

  • विद्यार्थियों के लिए लेखन और वाचन कार्यशालाएँ आयोजित करना।


अधिकार और कर्तव्य

इस निबंध में किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और उसके कर्तव्य की बात की गई है। आपकी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार और कर्तव्य दिए गए हैं। उसे पढ़कर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर: कक्षा में मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों पर चर्चा करते समय समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक उपचार जैसे अधिकारों पर विचार किया जा सकता है।

इसके साथ ही संविधान का सम्मान करना, देश की एकता बनाए रखना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, पर्यावरण की सुरक्षा करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना और सभी नागरिकों के प्रति भाईचारा रखना हमारे महत्वपूर्ण कर्तव्य हैं।


सृजन

हमारा पुस्तकालय

आप अपने विद्यालय एवं सार्वजनिक पुस्तकालय में जाते हैं। हो सकता है, आपको कभी कोई पुस्तक फटी हुई मिली हो या उसमें से कुछ पृष्ठ गायब हों अथवा उसमें पेन से निशान लगे हों-

  • ऐसा होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

  • ऐसा न हो, इसके लिए क्या किया जा सकता है?

  • आप पुस्तकालय में किन नियमों का पालन करते हैं, उन नियमों का पालन करना क्यों अनिवार्य है? इस पर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।

उत्तर: पुस्तकों के फटने, पृष्ठ गायब होने या उन पर निशान लगे होने का मुख्य कारण कुछ पाठकों की लापरवाही और अनुशासनहीनता हो सकती है। कभी-कभी पुस्तक जारी करते और वापस लेते समय उचित जाँच न होने से भी दोषी व्यक्ति का पता नहीं चल पाता।

इस समस्या से बचने के लिए प्रत्येक पुस्तक की नियमित जाँच होनी चाहिए। पुस्तक को नुकसान पहुँचाने वाले विद्यार्थी को समझाया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उससे पुस्तक की मरम्मत या मूल्य की भरपाई कराई जाए।

पुस्तकालय में मैं निम्नलिखित नियमों का पालन करता हूँ—

  • शांत रहकर पुस्तक पढ़ता हूँ।

  • पुस्तकों पर कुछ नहीं लिखता।

  • पुस्तक के पृष्ठ नहीं मोड़ता या फाड़ता।

  • पुस्तक को निर्धारित समय पर वापस करता हूँ।

  • पुस्तक को पढ़ने के बाद उचित स्थान पर रखता हूँ।

  • भोजन या पेय पदार्थ पुस्तकालय में नहीं ले जाता।

इन नियमों का पालन करना आवश्यक है क्योंकि पुस्तकालय की पुस्तकें सार्वजनिक संपत्ति हैं और उनका उपयोग अनेक विद्यार्थियों को करना होता है।

ब्रेल लिपि में पुस्तकें

आपके विद्यालय में रोचक पुस्तकों का भंडार है परंतु आपके ‘दृष्टिबाधित’ सहपाठी स्वयं पढ़कर इनका आनंद नहीं उठा पाते हैं। प्रधानाध्यापक को ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में पत्र लिखिए।

उत्तर:

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
डी.ए.वी. विद्यालय,
चंडीगढ़।

दिनांक: 13 अप्रैल 2027

विषय: विद्यालय पुस्तकालय में ब्रेल लिपि की पुस्तकें मँगवाने हेतु अनुरोध

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं कक्षा 9 ‘बी’ का विद्यार्थी हूँ। हमारे विद्यालय में कुछ दृष्टिबाधित विद्यार्थी भी पढ़ते हैं। वे कक्षा में ध्यानपूर्वक सुनते हैं, परंतु सामान्य लिपि में उपलब्ध पुस्तकों को स्वयं पढ़ने में असमर्थ हैं।

आजकल पाठ्यपुस्तकें, कहानियाँ, सामान्य ज्ञान और अन्य उपयोगी पुस्तकें ब्रेल लिपि में उपलब्ध हैं। अतः आपसे अनुरोध है कि विद्यालय के पुस्तकालय में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए आवश्यक ब्रेल पुस्तकें मँगवाने की व्यवस्था करें। इससे उन्हें स्वतंत्र रूप से अध्ययन करने और पुस्तकालय की सुविधाओं का समान लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

आशा है कि आप इस अनुरोध पर शीघ्र उचित कार्रवाई करेंगे।

धन्यवाद।

भवदीय
सौरभ
कक्षा 9 ‘बी’


कृतज्ञता ज्ञापन

“अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीप जलाए…”

देश के विकास में सभी का सहयोग होता है जो सीमा पर तैनात हैं और जो देश के भीतर हैं; जैसे—अध्यापक, किसान, श्रमिक, कलाकार, वैज्ञानिक, अभियंता आदि। इन सभी के अमूल्य योगदान के लिए कृतज्ञता ज्ञापन तैयार करके लिखिए।

उत्तर:

अध्यापकों के प्रति कृतज्ञता

हे राष्ट्र-निर्माताओ! आप अपने ज्ञान, परिश्रम और मार्गदर्शन से देश की नई पीढ़ी का निर्माण करते हैं। आपके द्वारा शिक्षित विद्यार्थी ही भविष्य में देश की प्रगति में योगदान देते हैं। राष्ट्र आपके अमूल्य योगदान के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा।


किसानों के प्रति कृतज्ञता

हे अन्नदाताओ! आपके अथक परिश्रम से खेतों में फसलें लहलहाती हैं और देशवासियों का पेट भरता है। कठिन मौसम और अनेक समस्याओं के बीच भी आप निरंतर कार्य करते हैं। संपूर्ण राष्ट्र आपके श्रम को नमन करता है।


श्रमिकों के प्रति कृतज्ञता

हे कर्मवीरो! आपके परिश्रम से भवन, सड़कें, पुल, कारखाने और बाँध बनते हैं। आधुनिक सभ्यता और देश की आधारभूत संरचना आपके श्रम पर टिकी हुई है। कृतज्ञ राष्ट्र आपको प्रणाम करता है।


सैनिकों के प्रति कृतज्ञता

हे वीर सैनिकों! आप कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। आपके त्याग और साहस के कारण देशवासी सुरक्षित जीवन जीते हैं। राष्ट्र आपके बलिदान को सदैव स्मरण रखेगा।


वैज्ञानिकों और अभियंताओं के प्रति कृतज्ञता

आपके आविष्कार, अनुसंधान और तकनीकी विकास से देश आत्मनिर्भर तथा शक्तिशाली बनता है। चिकित्सा, अंतरिक्ष, संचार, कृषि और उद्योग में आपका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।


कलाकारों के प्रति कृतज्ञता

आप अपनी कला के माध्यम से देश की संस्कृति, परंपराओं और मानवीय भावनाओं को जीवित रखते हैं। आपकी रचनाएँ समाज को संवेदनशील और जागरूक बनाती हैं।


विज्ञापन

“ठीक मनुष्य को अपना मत दें।”

उपर्युक्त पंक्ति में चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने का संदेश दिया गया है। आप भी चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।


आप भी चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।


उत्तर:


आपका मत—आपका अधिकार  सोच-समझकर मतदान करें!  न जाति पर, न धर्म पर, मत दें अच्छे कर्म पर।


आपका मत—आपका अधिकार

सोच-समझकर मतदान करें!

न जाति पर, न धर्म पर,
मत दें अच्छे कर्म पर।

ऐसा उम्मीदवार चुनें जो—

  • ईमानदार और जिम्मेदार हो।

  • जनता की समस्याओं को समझता हो।

  • भ्रष्टाचार से दूर हो।

  • शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास को प्राथमिकता देता हो।

  • सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करता हो।

लालच और झूठे वादों से बचें।
योग्य उम्मीदवार चुनें, देश का भविष्य सँवारें।

स्वच्छता और आचरण

“क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं…..”

निबंध के इस अंश को पुनः पढ़िए। इस प्रकार के और कौन-कौन से आचरण हो सकते हैं जिनसे देश के सौंदर्य को आघात लगता है? इस विषय पर अपने अभिभावकों, सहपाठियों और शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए।

(संकेत – ऐतिहासिक या सार्वजनिक स्थानों पर अपना नाम आदि लिखना।)

उत्तर:

देश के सौंदर्य को नुकसान पहुँचाने वाले कुछ अनुचित आचरण निम्नलिखित हैं—

  • सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकना।

  • ऐतिहासिक इमारतों और दीवारों पर नाम लिखना।

  • सार्वजनिक स्थानों पर थूकना।

  • खुले स्थानों पर मल-मूत्र त्याग करना।

  • पार्कों से फूल और पौधे तोड़ना।

  • सार्वजनिक फर्नीचर, वाहन और अन्य संपत्ति को नुकसान पहुँचाना।

  • नदियों और तालाबों में कचरा डालना।

  • तेज आवाज में संगीत बजाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाना।

  • प्लास्टिक और अन्य हानिकारक पदार्थ खुले में फेंकना।

  • विद्यालय की दीवारों, मेजों और कुर्सियों पर लिखना।


भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

संदर्भ में शब्द

नीचे लिखे वाक्यों पर ध्यान दीजिए—


नीचे लिखे वाक्यों पर ध्यान दीजिए.png


  • एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई।

  • क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई।

दीवार में पैदा हुई चटक/तरेड़/फाँक/टूटन के लिए ‘दरार’ शब्द का प्रयोग करते हैं। भूकंप आने पर अथवा किसी भी प्रकार के तोड़-फोड़ का कार्य होने पर भवनों की छतों और दीवारों में दरार पड़ जाती है। इस शब्द का प्रयोग ऐसे भी किया जाता है—

  • वे बहुत अच्छे मित्र थे। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उनके संबंधों में दरार पड़ गई।

  • भेदभाव की भावना सामाजिक एकता में दरार डालती है।

अब इसी प्रकार ‘गाँठ’ शब्द के प्रयोग पर ध्यान दीजिए—

  • “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है, जो नागरिक और देश को एक साथ बाँधती है।”

  • माला गूँथते समय धागे के एक सिरे पर गाँठ बाँध दीजिए।

इसी प्रकार ‘पानी’ शब्द का प्रयोग देखिए—

  • बहुत प्यास लगी है, पानी दीजिए।

  • जब उस लड़के की पुस्तक से पन्ने फाड़ने की बात सामने आई तो वह पानी-पानी हो गया।

  • इतनी अधिक वर्षा हुई कि चारों ओर पानी-पानी हो गया।

  • अब इनके कामों के बारे में और क्या कहा जाए, इनका तो पानी ही उतर चुका है।

अब अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।

उत्तर:

पाठ में ‘खेल’, ‘सेवा’, ‘खड़ा’, ‘फैलना’ और ‘अर्थ’ जैसे कई शब्द संदर्भ के अनुसार अलग-अलग अर्थ व्यक्त करते हैं।

‘खेल’ शब्द के अलग-अलग प्रयोग—

  1. तुम कौन-सा खेल खेलते हो?
    अर्थ: मनोरंजन या प्रतियोगिता

  2. मैं समझ गया कि तुम मेरे साथ कौन-सा खेल खेल रहे हो।
    अर्थ: चाल या षड्यंत्र

  3. मैं खेल-खेल में तुम्हारी नीयत समझ गया।
    अर्थ: सहज या मनोरंजक ढंग से

  4. विरोधी टीम ने दूसरी टीम का खेल समाप्त कर दिया।
    अर्थ: अवसर या प्रभाव समाप्त करना

  5. यह सब भाग्य का खेल है।
    अर्थ: परिस्थिति या संयोग


मिलते-जुलते भाव वाले ‘शब्द-युग्म’

“अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”

“इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।”

पहले वाक्य में ‘ममता-दुलार’ और दूसरे वाक्य में ‘भरा-पूरा’ शब्द मिलता-जुलता भाव दे रहे हैं। ये शब्द-युग्म हैं। शब्द-युग्म प्रायः दो शब्दों के समूह होते हैं। ये कई प्रकार से बनते और बनाए जाते हैं। कभी अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, कभी उच्चारण की दृष्टि से समान होते हैं परंतु अर्थ में अंतर होता है, कभी विपरीत भाव भी देते हैं। इस प्रकार के शब्दों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आती है।

आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।

उत्तर:

मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द-युग्म—

  • ममता-दुलार

  • घूम-फिर

  • भरा-पूरा

  • दया-प्रार्थना

  • मेला-ठेला

  • पास-पड़ोस

  • दाल-रोटी

  • हीरे-मोती

  • मोटर-बस

  • होटल-धर्मशाला

पुनरुक्त शब्द—

  • पूरा-पूरा

  • बड़ी-बड़ी

  • खील-खील

  • छोटी-छोटी

  • बड़े-बड़े

  • बार-बार


शब्दों की कड़ियाँ/श्रृंखला

“मैं सोचा करता था कि मेरी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।”

उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित शब्द ‘अपूर्णता’ में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का ही प्रयोग चिह्नित किया गया है। इस प्रयोग को समझकर नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए—


इस प्रयोग को समझकर नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए.png


(आपकी पाठ्यपुस्तक के ‘क्या लिखूँ ?’ पाठ में भी उपसर्ग और प्रत्यय के प्रयोग के विषय में जानकारी दी गई है।)

उत्तर:

शब्द

उपसर्ग

मूल शब्द

प्रत्यय

अलौकिक

लोक

इक

निरक्षरता

निर्

अक्षर

ता

सम्मानित

सम्

मान

इत

अनावश्यक

अन्

अवश्य

अपमानित

अप

मान

इत

अभिमानी

अभि

मान


गतिविधियाँ

‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’

इस विषय पर परिचर्चा का आयोजन कीजिए और परिचर्चा में उभरकर आए बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार कीजिए। रिपोर्ट को पावर प्वांइट प्रस्तुतीकरण या चार्ट के माध्यम से कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:

परिचर्चा रिपोर्ट

विषय: देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है

विद्यालय में आयोजित परिचर्चा में विद्यार्थियों ने बताया कि देश केवल भूमि, नदियों, पहाड़ों और सीमाओं का समूह नहीं होता। देश का वास्तविक स्वरूप वहाँ रहने वाले नागरिकों, उनकी संस्कृति, भाषा, इतिहास, परंपराओं, संविधान और साझा मूल्यों से बनता है।

परिचर्चा में यह भी सामने आया कि प्रत्येक नागरिक अपने आचरण से देश का प्रतिनिधित्व करता है। नागरिकों की ईमानदारी, अनुशासन, स्वच्छता, शिक्षा और परस्पर सहयोग देश को मजबूत बनाते हैं। देश की एकता और प्रतिष्ठा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

निष्कर्ष रूप में यह स्वीकार किया गया कि देश भूमि और सीमाओं के साथ-साथ नागरिकों की भावनाओं, जिम्मेदारियों और साझा पहचान का भी नाम है।


भाषा संगम

“मैं अपने देश का नागरिक हूँ।”

नीचे ‘देश’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

  • इनके अतिरिक्त यदि आप ‘देश’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

  • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

उत्तर:

सिरायकी भाषा में—

“मैं अपने देश दा नागरिक हाँ।”

खोजबीन

निबंध में स्वामी रामतीर्थ के अनुभव का उल्लेख किया गया है। आप अपने पुस्तकालय या इंटरनेट से उनके विषय में सामग्री खोजकर पढ़िए और सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।

उत्तर:

विद्यार्थी स्वामी रामतीर्थ के जीवन, शिक्षा, वेदांत दर्शन, विदेश यात्राओं और भारतीय संस्कृति के प्रचार में उनके योगदान के विषय में पुस्तकालय या विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोतों से जानकारी एकत्र कर सकते हैं। प्राप्त जानकारी को संक्षिप्त बिंदुओं या प्रस्तुतीकरण के रूप में कक्षा में साझा किया जा सकता है।


Improve Your Preparation with Class 9 Hindi Chapter 7 Main Aur Mera Desh

Vedantu’s NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 Main Aur Mera Desh help students understand Kanhaiyalal Mishra ‘Prabhakar’s ideas about the strong connection between an individual and the nation, citizens’ rights and duties, responsible behaviour, national honour and the importance of choosing the right representative. This page provides simple and well-structured answers to all textbook questions, including MCQs, value-based questions, creative writing, letter writing, grammar activities and chapter exercises. Students should first read the chapter and attempt the questions independently, then compare their responses with these solutions for better revision and exam preparation.


CBSE Class 9 Hindi Chapter 7 Other Study Materials

S.No

Important Links for Chapter 7 Class 9 Hindi

1

Class 9 Main Aur Mera Desh Important Questions

2

Class 9 Main Aur Mera Desh Revision Notes



Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga

Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.


S.No

NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF

1

Chapter 1 - Do Bailon Ki Katha Solutions

2

Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions

3

Chapter 3 - Samvaadheen Solutions

4

Chapter 4 -  Aisi Bhi Baatein Hoti Hein Solutions

5

Chapter 5 - Aakhri Chataan Tak Solutions

6

Chapter 6 - Reed Ki Haddi Solutions

7

Chapter 8 - Pad Solutions

8

Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions

9

Chapter 10 - Bharati Jay Vijaykare! Solutions

10

Chapter 11 - Jhansi Ki Rani Solutions

11

Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions



Additional Study Materials for Class 9 Hindi

FAQs on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 Mai Aur Mera Desh (2026-27)

1. Where can I download NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 Mai Aur Mera Desh PDF?

Students can download the FREE PDF of NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 Mai Aur Mera Desh from Vedantu. The PDF provides simple, well-structured and exam-ready प्रश्न-उत्तर for the 2026-27 academic session.

2. Who is the author of Mai Aur Mera Desh?

Mai Aur Mera Desh was written by Kanhaiyalal Mishra ‘Prabhakar’ (कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’). Through this निबंध, the author explains the close relationship between an individual and the nation, along with the अधिकार and कर्तव्य of responsible citizens.

3. What is the main theme of Class 9 Hindi Chapter 7 Mai Aur Mera Desh?

The main theme of Mai Aur Mera Desh is the strong connection between व्यक्ति and राष्ट्र. The chapter explains that a citizen’s actions can increase or reduce the सम्मान of the country, while the country’s dignity also affects the respect received by its citizens.

4. What message does Mai Aur Mera Desh give to students?

The chapter teaches students that every नागरिक can contribute to the progress of the country. Honesty, discipline, cleanliness, देशप्रेम, responsible behaviour and respect for national values help strengthen the nation.

5. Why is Lala Lajpat Rai mentioned in Class 9 Hindi Ganga Chapter 7?

Lala Lajpat Rai is mentioned because his अनुभव made the author realise that personal success cannot provide complete गौरव when one’s country is under foreign rule. His words created a major change in the author’s thinking about individual and national सम्मान.

6. What lesson does the Japanese youth’s incident give in Mai Aur Mera Desh?

The Japanese युवक gave fresh fruits to Swami Ramtirth and requested him not to say that good fruits were unavailable in Japan. His action reflects देशभक्ति, self-respect and concern for the reputation of his country.

7. What are Shakti-Bodh and Saundarya-Bodh in Class 9 Hindi Chapter 7?

शक्ति-बोध means strengthening the country’s confidence, unity and collective power. सौंदर्य-बोध means protecting cleanliness, discipline, good behaviour and cultural refinement so that the beauty and dignity of the nation are maintained.

8. Why does the chapter emphasise choosing the right candidate in an election?

The chapter explains that चुनाव reflects the awareness and responsibility of citizens. By voting for an honest, capable and responsible उम्मीदवार, people can protect democracy and support the development of the country.

9. What topics are covered in NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7?

The solutions cover बहुविकल्पीय प्रश्न, understanding-based answers, विचारात्मक प्रश्न, creative writing, पत्र-लेखन, विज्ञापन, grammar exercises, elections, citizens’ rights and duties, and other textbook activities.

10. How can Vedantu’s Class 9 Hindi Chapter 7 solutions help in exam preparation?

Vedantu’s NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 7 provide clear and organised answers to all textbook questions. Students can use them for गृहकार्य, revision, answer-writing practice and understanding important ideas such as देशप्रेम, जिम्मेदार नागरिकता and national honour.