Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 रीढ़ की हड्डी NCERT Solutions - FREE PDF Download
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 Reedh Ki Haddi (रीढ़ की हड्डी) explain the chapter in simple, clear language and provide complete answers to every textbook question. Students can understand the main idea, the important events and descriptions, and the meaning of new words, helping them prepare full-mark answers in proper Hindi.
The NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga explains each question clearly, cover all important points, and use the kind of Hindi that examiners expect in answers. Written as per the CBSE 2026-27 syllabus, the FREE PDF is perfect for quick reference before tests and exams.
Class 9 Ganga Chapter 6 Questions and Answers
(पृष्ठ 113-118)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1. एकांकी रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
उत्तर: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
क्यों – इस एकांकी में ‘रीढ़ की हड्डी’ का प्रयोग शारीरिक अंग के साथ-साथ आत्मसम्मान, साहस और दृढ़ व्यक्तित्व के प्रतीक के रूप में किया गया है। शंकर अपने पिता की अनुचित बातों का विरोध नहीं करता और हर निर्णय में उन्हीं पर निर्भर रहता है। उसमें स्वतंत्र विचार, नैतिक साहस और आत्मविश्वास का अभाव है। इसलिए शीर्षक उसके कमजोर और व्यक्तित्वहीन चरित्र पर व्यंग्य करता है।
प्रश्न 2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
(ग) विवाह और अशिक्षा पर
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
क्यों – इस एकांकी में विवाह, स्त्री-शिक्षा और दहेज से जुड़ी समाज की रूढ़िवादी सोच पर व्यंग्य किया गया है। समाज के कुछ लोग शिक्षित लड़कियों को पसंद नहीं करते और विवाह के लिए लड़की को वस्तु की तरह देखकर उसके रूप, व्यवहार तथा घरेलू गुणों की परीक्षा लेते हैं। विवाह तय करने के लिए झूठ, दिखावा और छल का सहारा लेना भी समाज की अनुचित मानसिकता को उजागर करता है।
प्रश्न 3. “घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
(ख) अनुभव और विवेक की कमी
(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
(घ) उदासीनता और एकाकीपन
उत्तर: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
क्यों – उमा का यह कथन शंकर की कायरता और कमजोर चरित्र पर तीखा व्यंग्य है। वह अपने पिता की अनुचित और रूढ़िवादी बातों का विरोध नहीं करता। उसके भीतर स्वयं निर्णय लेने और सही बात के पक्ष में खड़े होने का साहस नहीं है। इसके अतिरिक्त लड़कियों के छात्रावास के आसपास चक्कर लगाने की घटना उसकी चारित्रिक कमजोरी को भी प्रकट करती है।
प्रश्न 4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उत्तर: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
क्यों – उमा के अनुसार शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री प्राप्त करना या कॉलेज में पढ़ना नहीं है। वास्तविक शिक्षा व्यक्ति को सही और गलत में अंतर करना, आत्मसम्मान के साथ जीना तथा अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना सिखाती है। उमा स्वतंत्र विचार रखती है और अपने सम्मान से समझौता नहीं करती। इसलिए उसके लिए शिक्षा आत्मबल, जागरूकता और स्वतंत्र सोच का माध्यम है।
प्रश्न 5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
उत्तर: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
क्यों – गोपालप्रसाद और रामस्वरूप दोनों विवाह संबंधी सामाजिक रूढ़ियों और दिखावे से प्रभावित हैं। रामस्वरूप अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा को छिपाते हैं और उसे सजाकर लड़के वालों के सामने प्रस्तुत करते हैं। दूसरी ओर, गोपालप्रसाद लड़की की शिक्षा, रूप और घरेलू गुणों को अपनी रूढ़िवादी कसौटी पर परखते हैं। दोनों ही विवाह में सच्चाई और समानता के स्थान पर दिखावे तथा सामाजिक मान्यताओं को महत्त्व देते हैं।
प्रश्न 6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यत: कैसी है?
(क) औपचारिक और शुष्क
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
(घ) भावुक और संक्षिप्त
उत्तर: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
क्यों – एकांकी के संवाद सामान्य मध्यमवर्गीय परिवारों की बातचीत जैसे सहज और स्वाभाविक हैं। पात्रों की भाषा उनके स्वभाव, सामाजिक स्थिति और मानसिकता के अनुसार है। संवादों में हास्य, कटाक्ष और व्यंग्य का प्रभावी प्रयोग किया गया है। इन्हीं संवादों के माध्यम से स्त्री-शिक्षा, विवाह और सामाजिक रूढ़ियों पर चोट की गई है।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
(संकेत – उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)
उत्तर: बाबू रामस्वरूप अपनी बेटी उमा को कॉलेज में पढ़ाते हैं और उसे बी.ए. तक की शिक्षा दिलाते हैं। इससे वे आधुनिक और प्रगतिशील पिता दिखाई देते हैं। परंतु विवाह के समय उनका व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है। उन्हें भय रहता है कि यदि लड़के वालों को उमा की उच्च शिक्षा के विषय में पता चल गया, तो वे विवाह से मना कर देंगे।
वे उमा की शिक्षा को छिपाते हैं और उसे केवल मैट्रिक तक पढ़ी हुई बताते हैं। वे उसे सुंदर ढंग से सजाकर, चश्मा उतरवाकर और हारमोनियम बजाने के लिए कहकर लड़के वालों के सामने प्रस्तुत करते हैं। वे कमरे की सजावट और नाश्ते की व्यवस्था के माध्यम से भी प्रभाव डालने का प्रयास करते हैं।
रामस्वरूप जानते हैं कि लड़के वालों की सोच गलत है, फिर भी वे उनका खुलकर विरोध नहीं करते। वे बेटी की शिक्षा पर गर्व करने के स्थान पर उसे छिपाने लगते हैं। इससे उनके आधुनिक व्यवहार और रूढ़िवादी सोच के बीच का अंतर्द्वंद्व स्पष्ट होता है।
प्रश्न 2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर: ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ मुख्य रूप से शंकर और सांकेतिक रूप से रामस्वरूप के लिए आया है।
शंकर के संदर्भ में
शंकर को बिना रीढ़ की हड्डी वाला व्यक्ति इसलिए कहा गया है क्योंकि उसका कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व या स्पष्ट मत नहीं है। वह अपने पिता गोपालप्रसाद की प्रत्येक उचित-अनुचित बात पर सहमति प्रकट करता है। उसमें अपने जीवन का निर्णय स्वयं लेने और गलत परंपराओं का विरोध करने का साहस नहीं है।
शंकर की चारित्रिक कमजोरी भी सामने आती है। वह लड़कियों के छात्रावास के आसपास चक्कर लगाता था और वहाँ अपमानित भी हुआ था। इसके अतिरिक्त उसकी शारीरिक मुद्रा भी कमजोर दिखाई गई है। इस प्रकार ‘रीढ़ की हड्डी’ का अभाव उसके शारीरिक, मानसिक और नैतिक तीनों प्रकार के कमजोर व्यक्तित्व का प्रतीक है।
रामस्वरूप के संदर्भ में
रामस्वरूप उमा को उच्च शिक्षा तो दिलाते हैं, लेकिन विवाह के समय समाज की रूढ़िवादी सोच का विरोध नहीं कर पाते। वे बेटी की शिक्षा छिपाने और झूठ का सहारा लेने लगते हैं। उनमें भी अपनी सही बात पर दृढ़ता से खड़े रहने का साहस नहीं दिखाई देता। इसलिए सांकेतिक रूप से उनमें भी ‘रीढ़ की हड्डी’ अर्थात नैतिक दृढ़ता का अभाव है।
प्रश्न 3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर: प्रेमा की सोच से पता चलता है कि उस समय समाज के एक बड़े वर्ग में स्त्री-शिक्षा के प्रति रूढ़िवादी दृष्टिकोण था। लड़कियों की उच्च शिक्षा को आवश्यक नहीं माना जाता था। यह समझा जाता था कि स्त्रियों का काम केवल घर सँभालना, खाना बनाना और परिवार की सेवा करना है।
प्रेमा स्वयं अधिक पढ़ी-लिखी नहीं है। इसलिए वह शिक्षा के महत्त्व को ठीक प्रकार से नहीं समझ पाती। वह ‘स्त्री-सुबोधिनी’ जैसी पुस्तक के सीमित ज्ञान को ही स्त्रियों के लिए पर्याप्त मानती है। उसे लगता है कि अधिक पढ़ाई करने से लड़कियाँ परिवार की परंपराओं का पालन नहीं करेंगी।
उसकी सोच उस समय की अशिक्षा, संकीर्णता और पुरुष-प्रधान सामाजिक व्यवस्था को प्रकट करती है। इससे यह भी पता चलता है कि महिलाओं ने कई बार सामाजिक रूढ़ियों को अपना भाग्य मानकर स्वीकार कर लिया था।
प्रश्न 4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
उत्तर: लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक का चयन अत्यंत सोच-समझकर किया है। शारीरिक रूप से रीढ़ की हड्डी मनुष्य को सीधा खड़े रहने में सहायता करती है। सांकेतिक रूप में यह आत्मसम्मान, साहस, स्वतंत्र व्यक्तित्व और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है।
एकांकी में शंकर अपने पिता की हर बात मानता है और गलत सोच का विरोध नहीं करता। उसमें अपने जीवन का निर्णय स्वयं लेने का साहस नहीं है। उमा इसी व्यक्तित्वहीनता पर व्यंग्य करते हुए पूछती है कि शंकर के शरीर में रीढ़ की हड्डी है भी या नहीं। इस कारण शीर्षक एकांकी की मुख्य समस्या को प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है।
इस एकांकी का दूसरा शीर्षक ‘विवाह का दिखावा’ रखा जा सकता है। इसका कारण यह है कि विवाह संबंध तय करने की पूरी प्रक्रिया में सच्चाई के स्थान पर दिखावा, झूठ और छल दिखाई देता है। लड़की की शिक्षा छिपाई जाती है, उसे सजाकर दिखाया जाता है और लड़के की कमियों पर पर्दा डाला जाता है। यह शीर्षक विवाह से जुड़ी सामाजिक विडंबना को स्पष्ट करता है।
एक अन्य उपयुक्त शीर्षक ‘उमा का आत्मसम्मान’ भी हो सकता है, क्योंकि अंत में उमा साहसपूर्वक सत्य बोलती है और अपने सम्मान के लिए रूढ़िवादी सोच का विरोध करती है।
विधा से संवाद
एकांकी की पड़ताल
आप जानते ही हैं कि ‘रीढ़ की हड्डी’ एक एकांकी है। एकांकी में भी एक कहानी ही होती है, लेकिन एकांकी की रूपरेखा कहानी से थोड़ी अलग होती है।
आगे ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
एकांकी का नाम
लेखक का नाम
पात्र
परिवेश / देश-काल
रंग-निर्देश / मंच – निर्देश
संवाद- निर्देश
समस्या
संवाद
मुख्य विचार
समाधान / परिणाम
उत्तर:
1. एकांकी का नाम – रीढ़ की हड्डी
2. लेखक का नाम – जगदीशचंद्र माथुर
3. पात्र – उमा, प्रेमा, बाबू रामस्वरूप, शंकर, गोपालप्रसाद और रतन।
4. परिवेश / देश-काल – एक छोटे नगर के निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार का घर। कमरे में साधारण सजावट, एक तख्त, दरी, सोफा, हारमोनियम और हाथ से बनाई गई तस्वीरें हैं। यह परिवेश उस समय के मध्यमवर्गीय समाज और विवाह की परंपराओं को दर्शाता है।
5. रंग-निर्देश / मंच-निर्देश – “मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वे अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।”
इस निर्देश से मंच की सजावट, पात्रों की गतिविधि और दृश्य की शुरुआत की जानकारी मिलती है।
6. संवाद-निर्देश –
रामस्वरूप – “दरी उठाते हुए—और बीबी जी के कमरे से हारमोनियम उठा ला।”
रामस्वरूप – “बात काटकर—चुप-चुप… तुम्हें कतई जबान पर काबू नहीं है।”
कोष्ठक में दिए गए निर्देश पात्रों के हाव-भाव, बोलने के ढंग और मंचीय गतिविधियों को स्पष्ट करते हैं।
7. समस्या –
एकांकी की मुख्य समस्या विवाह से जुड़ी रूढ़िवादी सोच है। लड़के वाले पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहते और लड़की के पिता उसकी शिक्षा छिपाने के लिए विवश होते हैं। लड़की को वस्तु की तरह देखकर उसके रूप, शिक्षा और घरेलू गुणों की परीक्षा ली जाती है।
8. संवाद –
रामस्वरूप – “कहिए, शंकर बाबू, कितने दिनों की और छुट्टियाँ हैं?”
शंकर – “जी, कॉलेज की तो छुट्टियाँ नहीं हैं। वीकएंड में चला आया था।”
रामस्वरूप – “तो आपके कोर्स खत्म होने में अब साल भर रहा होगा?”
शंकर – “जी, यही कोई साल-दो साल।”
रामस्वरूप – “साल-दो साल?”
शंकर – “हँ-हँ-हँ! जी, एकाध साल का मार्जिन रखता हूँ।”
यह संवाद शंकर की पढ़ाई के प्रति लापरवाही और कमजोर व्यक्तित्व को उजागर करता है।
9. मुख्य विचार –
एकांकी का मुख्य विचार समाज में स्त्री और पुरुष के बीच शिक्षा तथा विवाह के संबंध में किए जाने वाले भेदभाव का विरोध करना है। पुरुषों के लिए शिक्षा को आवश्यक माना जाता है, जबकि स्त्रियों की शिक्षा को गृहस्थ जीवन के लिए बाधा समझा जाता है। लेखक ने इस रूढ़िवादी सोच पर व्यंग्य किया है।
10. समाधान / परिणाम –
अंत में उमा साहसपूर्वक अपनी शिक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करती है। वह स्वीकार करती है कि उसने बी.ए. पास किया है और शिक्षा प्राप्त करना कोई अपराध नहीं है। वह शंकर की चारित्रिक कमजोरी और गोपालप्रसाद की रूढ़िवादी सोच को सबके सामने उजागर कर देती है। इसके बाद विवाह की बातचीत समाप्त हो जाती है और लड़के वाले वहाँ से चले जाते हैं।
रंग-निर्देश
एकांकी की शुरुआत कुछ इस तरह से होती है-
(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वह अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।)
इस रंग-निर्देश द्वारा एकांकी की पृष्ठभूमि की रचना की गई है, जहाँ से एकांकी आगे बढ़ती है। एकांकी में स्थान, परिवेश, सामाजिक स्थिति आदि के विषय में पाठक और निर्देशक को सटीक जानकारी देने के लिए एकांकीकार / नाटककार प्राय: ऐसे रंग-निर्देशों का प्रयोग करता है। मंचन के समय निर्देशक के पास यह छूट होती है कि वह देश-काल और वातावरण के अनुसार मंच सज्जा, प्रकाश, पात्रों के वस्त्र आदि में आवश्यक परिवर्तन कर सकता है।
अब इस एकांकी को कक्षा में प्रस्तुत करने का समय है। अपने समूह के साथ मिलकर एकांकी के किसी एक दृश्य का चुनाव कीजिए। उसकी तैयारी कीजिए और कक्षा में उसे प्रस्तुत कीजिए।
(संकेत – (i) समूह बनाइए और उचित हाव-भाव द्वारा उस दृश्य का अभिनय कीजिए।
(ii) आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दिए गए रंग-निर्देश में परिवर्तन भी कर सकते हैं।)
उत्तर:
विद्यार्थी इस गतिविधि के लिए छह सदस्यों का समूह बना सकते हैं और प्रत्येक विद्यार्थी उमा, प्रेमा, रामस्वरूप, शंकर, गोपालप्रसाद तथा रतन में से किसी एक पात्र की भूमिका निभा सकता है।
मंच पर एक साधारण कमरा तैयार किया जा सकता है। इसमें तख्त, कुर्सियाँ, दरी, हारमोनियम और कुछ तस्वीरें रखी जा सकती हैं। विद्यार्थी गोपालप्रसाद और शंकर के आगमन से लेकर उमा द्वारा उनके रूढ़िवादी विचारों का विरोध करने तक का दृश्य चुन सकते हैं।
अभिनय करते समय पात्रों की आवाज, हाव-भाव, चेहरे के भाव और चलने-बैठने की शैली पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शंकर को झुकी हुई मुद्रा और संकोची स्वभाव में दिखाया जा सकता है, जबकि उमा को आत्मविश्वासी तथा स्पष्ट वक्ता के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। प्रस्तुति के अंत में विद्यार्थी एकांकी के सामाजिक संदेश पर संक्षिप्त चर्चा भी कर सकते हैं।
मेरी टिप्पणी
“जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं-यानी बैकबोन बैकबोन!”
उपर्युक्त वाक्य को ध्यान से पढ़िए। यह वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक टिप्पणी है जो एक व्यंग्य की तरह है।
‘टिप्पणी’ किसी व्यक्ति, विषय या घटना पर व्यक्त की गई एक संक्षिप्त राय, स्पष्टीकरण या विचार होता है। यह किसी के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी देने, किसी मुद्दे पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करने या किसी संदर्भ पर विचारों की अभिव्यक्ति होती है, जो पाठक को उस विषय पर एक नया दृष्टिकोण देती है।
टिप्पणी की कुछ विशेषताएँ हैं-
संक्षिप्तता – इसमें विषय के मुख्य बिंदुओं को कम शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है।
स्पष्टता – भाषा सरल, स्पष्ट और तर्कपूर्ण होनी चाहिए।
व्यक्तिपरकता – इसमें व्यक्ति के विचारों और सुझावों को शामिल किया जाता है।
अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: उमा की यह टिप्पणी शंकर के व्यक्तित्व पर किया गया तीखा और सटीक व्यंग्य है। यहाँ ‘रीढ़ की हड्डी’ का अर्थ केवल शरीर का अंग नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, साहस और स्वतंत्र विचार है। शंकर अपने पिता की अनुचित बातों का विरोध नहीं करता और अपने विवाह का निर्णय भी स्वयं नहीं ले पाता। उसमें सच के पक्ष में खड़े होने का साहस नहीं है।
उमा अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए शंकर और उसके पिता की रूढ़िवादी सोच को अस्वीकार कर देती है। उसकी टिप्पणी यह संदेश देती है कि विवाह के लिए केवल शिक्षा, धन या बाहरी रूप पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति में चरित्र, आत्मविश्वास और नैतिक दृढ़ता भी होनी चाहिए। उमा का साहस सभी शिक्षित और आत्मसम्मानी युवतियों के लिए प्रेरणादायक है।
विषयों से संवाद
तुलना और विचार
प्रश्न 1. “गोपालप्रसाद : भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।”
एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?
उत्तर: एकांकी में लड़कों और लड़कियों के प्रति भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण निम्नलिखित पंक्तियों में दिखाई देता है—
गोपालप्रसाद – “भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है। अरे, मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं, अंग्रेज़ी अखबार पढ़ने लगीं और ‘पॉलिटिक्स’ वगैरह पर बहस करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी।”
रामस्वरूप – “जी हाँ, और मर्द के दाढ़ी होती है, औरत के नहीं!”
इन पंक्तियों से स्पष्ट होता है कि गोपालप्रसाद पुरुषों की शिक्षा को आवश्यक मानते हैं, लेकिन स्त्रियों की उच्च शिक्षा को गृहस्थ जीवन के लिए बाधा समझते हैं। उनके अनुसार पुरुषों का कार्य पढ़ना, योग्य बनना और बाहरी दुनिया से जुड़ना है, जबकि स्त्रियों को केवल घर तक सीमित रहना चाहिए।
मेरे विचार से लड़कों और लड़कियों की शिक्षा में इस प्रकार का भेद करना पूरी तरह अनुचित और तर्कहीन है। शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का समान अधिकार है। लड़कियों को भी अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार पढ़ने, आगे बढ़ने तथा स्वतंत्र विचार रखने का अवसर मिलना चाहिए। शिक्षित स्त्री परिवार और समाज दोनों के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है। इसलिए लैंगिक भेदभाव को समाप्त करके दोनों को समान अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।
प्रश्न 2. “मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?
(संकेत-शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि)
उत्तर: उमा एक शिक्षित, जागरूक, आत्मसम्मानी और साहसी युवती है। वह अपने साथ होने वाले अनुचित व्यवहार को चुपचाप स्वीकार नहीं करती। जब गोपालप्रसाद और शंकर उसकी शिक्षा, रूप तथा घरेलू गुणों की परीक्षा लेने का प्रयास करते हैं, तब वह निर्भीक होकर उनका विरोध करती है।
उमा के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
वह अपने सम्मान और अधिकारों के प्रति सजग है।
वह अन्याय और भेदभाव का खुलकर विरोध करती है।
उसमें तार्किक ढंग से अपनी बात रखने की क्षमता है।
वह झूठ, दिखावे और रूढ़िवादी विचारों को स्वीकार नहीं करती।
उसमें साहस, आत्मविश्वास और स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति है।
वह पुरुषों और महिलाओं के लिए समान सामाजिक मानदंडों की समर्थक है।
उमा के व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ मुख्य रूप से उसकी शिक्षा के कारण विकसित हुई हैं। आधुनिक शिक्षा ने उसे सही और गलत के बीच अंतर करना तथा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना सिखाया है। उसके पिता ने उसे उच्च शिक्षा दिलाई, जिससे उसमें आत्मविश्वास और जागरूकता आई। यद्यपि विवाह के समय उसके माता-पिता सामाजिक दबाव में आ जाते हैं, फिर भी शिक्षा उमा को रूढ़ियों का विरोध करने का साहस प्रदान करती है।
सृजन
एकांकी का विस्तार
“रतन: बाबूजी, मक्खन!
(सब रतन की तरफ देखते हैं और परदा गिरता है।)”
प्रश्न 1. एकांकी के अंत में रतन कहता है- “बाबूजी, मक्खन…” और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?”
(संकेत – हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि)
उत्तर: एकांकी के अंत में रतन का “बाबूजी, मक्खन…” कहना हास्य और व्यंग्य दोनों उत्पन्न करता है। रामस्वरूप ने गोपालप्रसाद और शंकर को प्रसन्न करने के लिए मक्खन तथा अन्य खाद्य पदार्थ मँगवाए थे। वे उनकी खुशामद करके विवाह का संबंध तय करना चाहते थे।
परंतु उमा द्वारा सत्य उजागर कर दिए जाने के बाद गोपालप्रसाद और शंकर नाराज होकर वहाँ से चले जाते हैं। ठीक उसी समय रतन मक्खन लेकर पहुँचता है। अब वह मक्खन किसी काम का नहीं रहता। यह स्थिति रामस्वरूप के दिखावे, झूठ और खुशामद की निरर्थकता को उजागर करती है।
यह संवाद संकेत देता है कि झूठ और दिखावे के आधार पर बनाया गया संबंध अधिक समय तक नहीं टिक सकता। रतन की सामान्य-सी बात पूरी घटना पर तीखी टिप्पणी बन जाती है। इससे दर्शकों को हँसी भी आती है और सामाजिक रूढ़ियों की असफलता पर विचार करने का अवसर भी मिलता है।
प्रश्न 2. एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
उत्तर: (परदा दोबारा उठता है। रामस्वरूप चिंतित अवस्था में कमरे में खड़े हैं। प्रेमा एक ओर बैठी हुई है। उमा शांत लेकिन दृढ़ दिखाई दे रही है। तभी बाहर से गोपालप्रसाद और शंकर दोबारा कमरे में प्रवेश करते हैं।)
गोपालप्रसाद – बाबू रामस्वरूप! आपकी बेटी ने हमारा अपमान किया है। मैं इस बात को इतनी आसानी से नहीं भूलूँगा।
रामस्वरूप – अपमान किसने किसका किया है, यह आप अच्छी तरह जानते हैं। आपने मेरी बेटी को इंसान नहीं, बल्कि कोई वस्तु समझकर परखने का प्रयास किया।
गोपालप्रसाद – मैं वकील हूँ। चाहूँ तो आप पर मानहानि का मुकदमा कर सकता हूँ।
उमा – आप अवश्य मुकदमा कीजिए। अदालत में यह भी बताया जाएगा कि आपका पुत्र लड़कियों के छात्रावास के बाहर क्यों घूमता था और वहाँ से मुँह छिपाकर क्यों भागा था।
शंकर – पिताजी, चलिए यहाँ से। बात और बढ़ जाएगी।
गोपालप्रसाद – चुप रहो! तुम्हारी वजह से ही यह सब सुनना पड़ रहा है।
उमा – शंकर बाबू को भी अपने जीवन का निर्णय स्वयं लेना सीखना चाहिए। विवाह दो स्वतंत्र व्यक्तियों का संबंध होता है, किसी एक परिवार की मनमानी नहीं।
गोपालप्रसाद – लड़की होकर तुम हमसे इस तरह बात कर रही हो?
उमा – लड़की होना कमजोरी नहीं है। मुझे भी अपनी शिक्षा, सम्मान और भविष्य के विषय में निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
रामस्वरूप – उमा ठीक कह रही है। आज मुझे भी समझ आ गया है कि बेटी की शिक्षा छिपाकर मैंने बड़ी भूल की। मुझे उसकी शिक्षा पर गर्व होना चाहिए था।
प्रेमा – हाँ, बेटी! हमें तुम्हें झूठ बोलने के लिए विवश नहीं करना चाहिए था।
गोपालप्रसाद – तो इसका अर्थ है कि आप यह संबंध नहीं चाहते?
रामस्वरूप – ऐसा संबंध जिसमें हमारी बेटी के सम्मान और शिक्षा का आदर न हो, हमें स्वीकार नहीं है।
उमा – विवाह समानता, विश्वास और सम्मान पर आधारित होना चाहिए। दिखावे और दबाव पर नहीं।
शंकर – पिताजी, शायद उमा जी सही कह रही हैं। मुझे भी अपने विचार स्वयं रखने चाहिए।
गोपालप्रसाद – अब तुम भी मुझे ही समझाओगे?
शंकर – मैं केवल इतना कह रहा हूँ कि हमें अपनी सोच बदलनी चाहिए।
(गोपालप्रसाद क्रोधित होकर बाहर चले जाते हैं। शंकर कुछ देर रुककर उमा और रामस्वरूप से क्षमा माँगता है तथा अपने पिता के पीछे चला जाता है।)
रामस्वरूप – उमा, आज तुमने हमें भी सच्ची शिक्षा का अर्थ समझा दिया।
उमा – पिताजी, शिक्षा तभी सार्थक है जब वह हमें सत्य और आत्मसम्मान के पक्ष में खड़ा होना सिखाए।
रतन – बाबूजी, अब इस मक्खन का क्या करूँ?
(सभी एक-दूसरे की ओर देखते हैं और मुस्करा देते हैं। परदा गिरता है।)
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
मेरे शब्द
एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन- पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर:
1. कलसा
अनुमानित अर्थ – पानी रखने का बर्तन।
शब्दकोशीय अर्थ – धातु अथवा मिट्टी का बना घड़ा या कलश।
वाक्य – रतन मेहमानों के लिए कलसे में पानी भरकर लाया।
2. अधेड़
अनुमानित अर्थ – अधिक आयु वाला व्यक्ति।
शब्दकोशीय अर्थ – युवावस्था और वृद्धावस्था के बीच की आयु का व्यक्ति।
वाक्य – अधेड़ व्यक्ति कमरे में तख्त रखवा रहा था।
3. फितरती
अनुमानित अर्थ – मनमौजी स्वभाव वाला व्यक्ति।
शब्दकोशीय अर्थ – चालाक, शरारती अथवा स्वभाव से विचित्र व्यक्ति।
वाक्य – उस फितरती लड़के की बातों पर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता।
4. तल्लीनता
अनुमानित अर्थ – किसी कार्य में पूरी तरह डूब जाना।
शब्दकोशीय अर्थ – किसी काम या विचार में पूरी तरह मग्न होने की अवस्था।
वाक्य – उमा पूरी तल्लीनता से हारमोनियम बजा रही थी।
5. तकल्लुफ
अनुमानित अर्थ – परेशानी अथवा कठिनाई।
शब्दकोशीय अर्थ – औपचारिकता, शिष्टाचार के लिए किया गया बाहरी दिखावा या संकोच।
वाक्य – अपने लोगों के बीच किसी प्रकार के तकल्लुफ की आवश्यकता नहीं होती।
भाषा में मुहावरे
एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-
“उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है – खाली हाथ।”
“लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
“और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?”
“तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
“मगर तुम तो अभी से सब कुछ उगले देती हो।”
“यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
“बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
“लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
उत्तर:
1. भीगी बिल्ली होना
अर्थ – डर के कारण दबकर या चुप होकर रहना।
नया वाक्य – अध्यापक की डाँट सुनते ही शरारती छात्र भीगी बिल्ली बनकर बैठ गया।
2. मुँह फुलाना
अर्थ – नाराज होकर बैठ जाना।
नया वाक्य – छोटी-सी बात पर मुँह फुलाने के बजाय समस्या का समाधान करना चाहिए।
3. किस मर्ज की दवा होना
अर्थ – किसी काम का न होना या उपयोगिता पर प्रश्न उठाना।
नया वाक्य – यदि अधिकारी जनता की समस्या नहीं सुनेंगे, तो वे किस मर्ज की दवा हैं?
4. सिर चढ़ाना
अर्थ – जरूरत से अधिक लाड़-प्यार देकर उद्दंड बना देना।
नया वाक्य – बच्चे को इतना भी सिर पर नहीं चढ़ाना चाहिए कि वह किसी की बात न माने।
5. सब कुछ उगल देना
अर्थ – गोपनीय बात बता देना।
नया वाक्य – पुलिस की पूछताछ में अपराधी ने सारी सच्चाई उगल दी।
6. काँटों में घसीटना
अर्थ – अनावश्यक रूप से कठिनाई या विवाद में डालना।
नया वाक्य – अपने झगड़े में मुझे काँटों में मत घसीटो।
7. इज्जत उतारना
अर्थ – अपमानित करना।
नया वाक्य – सभा में किसी की इज्जत उतारना उचित व्यवहार नहीं है।
8. मुँह छिपाकर भागना
अर्थ – शर्मिंदा होकर या अपराध के कारण चुपचाप भाग जाना।
नया वाक्य – अपनी गलती सामने आते ही वह मुँह छिपाकर वहाँ से भाग गया।
संदर्भ में शब्द
“बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।”
एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर: मोहन के पिता अपने समय के प्रसिद्ध खिलाड़ी थे, लेकिन मोहन ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर उनसे भी बड़ी उपलब्धि प्राप्त की। इसलिए लोगों ने कहा—“बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।”
गतिविधियाँ
आप भी संवाददाता
प्रश्न 1. मान लीजिए कि आप एक संवाददाता हैं और आपको उमा की कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा अन्य पात्रों का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
उमा से साक्षात्कार
संवाददाता – नमस्कार उमा जी! आपके घर में विवाह संबंधी बातचीत के दौरान जो घटना हुई, उसके विषय में आप क्या कहना चाहेंगी?
उमा – नमस्कार। मैंने केवल अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा की। लड़के वालों ने मुझे मनुष्य के बजाय जाँचने-परखने की वस्तु समझ लिया था।
संवाददाता – आपको उनकी किस बात पर सबसे अधिक आपत्ति हुई?
उमा – उन्हें शिक्षित लड़की नहीं चाहिए थी। वे चाहते थे कि मैं कम पढ़ी-लिखी, चुप रहने वाली और हर बात मानने वाली लड़की बनकर रहूँ। शिक्षा प्राप्त करना कोई अपराध नहीं है।
संवाददाता – आपने शंकर के पुराने व्यवहार का उल्लेख क्यों किया?
उमा – क्योंकि जो लोग मेरे चरित्र, शिक्षा और गुणों की परीक्षा ले रहे थे, उन्हें पहले अपने बेटे का व्यवहार देखना चाहिए था। शंकर लड़कियों के छात्रावास के बाहर चक्कर लगाता था और पकड़े जाने पर मुँह छिपाकर भाग गया था।
संवाददाता – कुछ लोग आपके व्यवहार को कठोर कह सकते हैं।
उमा – अपने सम्मान की रक्षा करना कठोरता नहीं है। जब कोई गलत व्यवहार करे, तो उसका स्पष्ट उत्तर देना आवश्यक है।
संवाददाता – समाज की लड़कियों के लिए आपका क्या संदेश है?
उमा – लड़कियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। उन्हें किसी भी प्रकार के अपमान या भेदभाव को चुपचाप स्वीकार नहीं करना चाहिए।
संवाददाता – धन्यवाद उमा जी। आपके विचार निश्चय ही कई लोगों को प्रेरित करेंगे।
गोपालप्रसाद से साक्षात्कार
संवाददाता – नमस्कार गोपालप्रसाद जी। उमा के घर हुई घटना के बारे में आपका क्या कहना है?
गोपालप्रसाद – हमारे साथ बहुत अनुचित व्यवहार हुआ। हमें वहाँ विवाह की बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन लड़की ने सबके सामने हमारा अपमान कर दिया।
संवाददाता – क्या यह सही है कि आप अपने बेटे के लिए कम पढ़ी-लिखी लड़की चाहते थे?
गोपालप्रसाद – मेरा मानना है कि बहुत अधिक पढ़ी-लिखी लड़की गृहस्थी ठीक से नहीं संभाल पाती।
संवाददाता – लेकिन आपका बेटा स्वयं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है। फिर लड़की की शिक्षा पर आपत्ति क्यों?
गोपालप्रसाद – लड़कों और लड़कियों की जिम्मेदारियाँ अलग होती हैं।
संवाददाता – उमा का आरोप है कि आपने उसके साथ वस्तु की तरह व्यवहार किया।
गोपालप्रसाद – विवाह से पहले लड़की के गुणों और व्यवहार के विषय में जानना आवश्यक होता है।
संवाददाता – क्या लड़के के चरित्र और गुणों की परीक्षा भी उसी प्रकार नहीं होनी चाहिए?
गोपालप्रसाद – इस विषय में मैं कुछ नहीं कहना चाहता।
संवाददाता – क्या आपको लगता है कि समय के साथ विवाह और स्त्री-शिक्षा से संबंधित विचार बदलने चाहिए?
गोपालप्रसाद – समाज बदल रहा है, इसलिए शायद हमें भी कुछ बातों पर दोबारा विचार करना चाहिए।
संवाददाता – धन्यवाद।
रामस्वरूप से साक्षात्कार
संवाददाता – रामस्वरूप जी, आपने उमा की शिक्षा लड़के वालों से क्यों छिपाई?
रामस्वरूप – मुझे डर था कि उसकी उच्च शिक्षा के कारण वे विवाह से इनकार कर देंगे। सामाजिक दबाव में आकर मैंने यह गलती की।
संवाददाता – क्या अब आपको अपने निर्णय पर पछतावा है?
रामस्वरूप – हाँ। मुझे अपनी बेटी की शिक्षा पर गर्व करना चाहिए था। उसकी योग्यता छिपाना उसके साथ अन्याय था।
संवाददाता – उमा के विरोध के बारे में आपका क्या विचार है?
रामस्वरूप – उसने जो कहा, सही कहा। उसने न केवल अपना, बल्कि सभी शिक्षित लड़कियों का पक्ष रखा।
संवाददाता – धन्यवाद।
प्रश्न 2. मान लीजिए कि आप उमा के घर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं जब उसके घर में शंकर आया था। इस पूरे घटनाक्रम को जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) की तरह प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: नमस्कार! हम इस समय बाबू रामस्वरूप के घर के बाहर उपस्थित हैं, जहाँ उनकी बेटी उमा को विवाह के लिए देखने गोपालप्रसाद और उनका पुत्र शंकर आए हैं। घर के भीतर मेहमानों के स्वागत के लिए विशेष तैयारियाँ की गई हैं। कमरे को सजाया गया है और नाश्ते का प्रबंध भी किया गया है।
अभी गोपालप्रसाद और शंकर कमरे में बैठे हुए हैं। गोपालप्रसाद उमा की शिक्षा, घर के काम और रुचियों के विषय में प्रश्न पूछ रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि वे अपने बेटे के लिए अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहते। उनका मानना है कि स्त्रियों की अधिक शिक्षा गृहस्थ जीवन के लिए उचित नहीं है।
अब उमा कमरे में प्रवेश कर चुकी है। वह हारमोनियम बजा रही है और गोपालप्रसाद उसके गुणों की परीक्षा लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। वातावरण धीरे-धीरे असहज होता जा रहा है।
अभी एक बड़ा खुलासा हुआ है। उमा ने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार कर लिया है कि उसने बी.ए. पास किया है। रामस्वरूप ने उसकी शिक्षा छिपाने की कोशिश की थी। गोपालप्रसाद इस बात से नाराज दिखाई दे रहे हैं।
उमा अब बहुत आत्मविश्वास के साथ बोल रही है। उसने कहा है कि शिक्षा प्राप्त करना न तो अपराध है और न चोरी। उसने लड़कियों को वस्तु की तरह देखने की मानसिकता का विरोध किया है। इसके साथ ही उसने शंकर के लड़कियों के छात्रावास के आसपास चक्कर लगाने की घटना भी सबके सामने प्रकट कर दी है।
शंकर अत्यंत घबराया और शर्मिंदा दिखाई दे रहा है। गोपालप्रसाद क्रोधित होकर वहाँ से जाने की तैयारी कर रहे हैं। उमा ने जाते-जाते उन पर तीखा व्यंग्य किया है कि घर जाकर यह पता कर लें कि उनके पुत्र के शरीर में रीढ़ की हड्डी है भी या नहीं।
इसी समय नौकर रतन मक्खन लेकर कमरे में पहुँचा है और कह रहा है—“बाबूजी, मक्खन!” यह सामान्य-सा संवाद पूरी घटना पर गहरा व्यंग्य बन गया है। जिन अतिथियों के लिए मक्खन मँगाया गया था, वे बिना खाए ही जा चुके हैं।
इस घटना ने विवाह व्यवस्था में व्याप्त दिखावे, झूठ, स्त्री-शिक्षा के विरोध और लैंगिक भेदभाव पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। उमा ने अपने आत्मसम्मान और शिक्षा के बल पर रूढ़िवादी विचारों का साहसपूर्वक विरोध किया है।
कैमरामैन के साथ मैं हूँ आपका संवाददाता। धन्यवाद।
भाषा संगम
“मक्खन वाले की दुकान दूर है”
नीचे ‘मक्खन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
मक्खन (हिंदी); नवीनतम् (संस्कृत); मक्खण (पंजाबी); मक्खन (उर्दू) ; टॅन्य ( कश्मीरी ); मखणु (सिंधी); लोणी (मराठी); माखण, नवनीत (गुजराती); लोणी (कोंकणी); नौनी, माखन (नेपाली); माखन ननी ( बांग्ला); माखन (असमिया ) ; माखोन (मणिपुरी); लहुणी, मक्खन (ओड़िआ ) ; वेन्नै (तेलुगु); वेर्णय् (तमिल) ; वेण्ण (मलयालम); वेण्णे (कन्नड़)।
इनके अतिरिक्त यदि आप ‘मक्खन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
अन्य भाषाओं में ‘मक्खन’ शब्द—
हरियाणवी – माक्खण
भोजपुरी – माखन
राजस्थानी – माखण
अवधी – माखन
ब्रज भाषा – माखन
“मक्खन वाले की दुकान दूर है” का विभिन्न भाषाओं में रूप—
पंजाबी – मक्खण वाले दी दुकान दूर है।
हरियाणवी – माक्खण आले की दुकान दूर सै।
भोजपुरी – माखन वाला के दुकान दूर बा।
राजस्थानी – माखण वाले री दुकान दूर है।
अवधी – माखन वाले की दुकान दूर अहै।
विद्यार्थी इस वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखते समय परिवार के सदस्यों अथवा शिक्षक की सहायता ले सकते हैं।
Advantages of Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 NCERT Solutions
Covers all textbook questions and activities from Chapter 6.
Explains the title, characters, themes, dialogues, and social message.
Provides simple and exam-ready answers in proper Hindi.
Helps students understand humour, satire, stage directions, and idioms.
Improves long-answer and short-answer writing skills.
Supports quick revision before school tests and examinations.
Includes activity-based answers, interviews, live reports, and creative writing.
The FREE PDF can be used for offline revision at any time.
CBSE Class 9 Hindi Chapter 6 Reedh Ki Haddi Other Study Materials
S.No | Important Links for Chapter 6 Class 9 Hindi |
1 | Class 9 Reedh Ki Haddi Important Questions |
2 | Class 9 Reedh Ki Haddi Revision Notes |
Chapter-Specific NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga
Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.
S.No | NCERT Solutions Class 9 Chapter-wise Hindi PDF |
1 | Chapter 1 - Do Bailon Ki Katha Solutions |
2 | Chapter 2 - Kya Likhun? Solutions |
3 | Chapter 3 - Samvaadheen Solutions |
4 | Chapter 4 - Aisi Bhi Baatein Hoti Hein Solutions |
5 | Chapter 5 - Aakhri Chataan Tak Solutions |
6 | Chapter 7 - Main Aur Mera Desh Solutions |
7 | Chapter 8 - Pad Solutions |
8 | Chapter 9 - Ram-Lakshman-Parshuram-Sanvaad Solutions |
9 | Chapter 10 - Bharati Jay Vijaykare! Solutions |
10 | Chapter 11 - Jhansi Ki Rani Solutions |
11 | Chapter 12 - Ghar Ki Yaad Solutions |
Additional Study Materials for Class 9 Hindi
S.No | Important Study Material for Hindi Class 9 |
1 | |
2 | |
3 | |
4 | |
5 |
FAQs on NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 Reedh Ki Haddi (रीढ़ की हड्डी) 2026-27
1. What is the main message of Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी?
The play teaches that education, self-respect, courage, and independent thinking are essential for every individual. It opposes gender discrimination, outdated marriage customs, and the practice of treating girls as objects during marriage discussions.
2. Who wrote रीढ़ की हड्डी from Class 9 Hindi Ganga, and what type of literary work is it?
रीढ़ की हड्डी was written by Jagdish Chandra Mathur. It is an एकांकी, or one-act play, that uses natural dialogues, humour, and satire to highlight social inequality and discrimination against educated women.
3. Where can I download the Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 रीढ़ की हड्डी PDF?
Students can download the FREE PDF of NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 रीढ़ की हड्डी from Vedantu. The PDF includes detailed textbook answers, important questions, grammar exercises, activities, and exam-ready explanations for the 2026–27 session.
4. Why is the chapter 6 of NCERT Class 9 Hindi titled रीढ़ की हड्डी?
The title symbolises courage, self-respect, moral strength, and an independent personality. Shankar is described as lacking a “backbone” because he cannot make his own decisions or oppose his father’s unfair and outdated ideas.
5. What type of questions are covered in the रीढ़ की हड्डी NCERT Solutions?
The solutions cover multiple-choice questions, short and long answers, character-based questions, title justification, grammar exercises, idioms, creative writing, interviews, live reporting, and activity-based questions.
6. How can students prepare from NCERT Solutions for Class 9 Hindi रीढ़ की हड्डी for examinations?
Students should understand the chapter’s main message, revise the characters, practise textbook questions, learn important dialogues, and prepare topics such as women’s education, gender discrimination, self-respect, satire, and the significance of the title.
7. Can students study Class 9 Hindi Chapter 6 solutions offline?
Yes, students can download the FREE PDF of Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 रीढ़ की हड्डी from Vedantu and use it for offline study whenever required.



















