NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antral Chapter 2 Hussein Ki Kahani Aapni Zubani

Class 11 Hindi NCERT Solutions for Antral Chapter 2 Hussein Ki Kahani Aapni Zubani

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Access NCERT  Solutions For Hindi Class-11 पाठ २ - हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी part-1

Access NCERT Solutions For Hindi Class-11 पाठ २ - हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी

प्रश्न-अभ्यास:

1. लेखक ने अपने पांच मित्रों के जो शब्द-चित्र प्रस्तुत किए हैं, उनसे उनके अलग- अलग व्यक्तित्व की झलक मीलती है फिर भी वो घनिष्ठ मित्र हैं कैसे?

उत्तर: लेखक की मुलाकात अपने पांच मित्रों से बोर्डिंग में एक साथ रहते हुए हुई थी। लेखक के पांच मित्र उनके नाम मोहम्मद इब्राहिम गोहर अली, अर्शद, हामिद कंबर हुसैन, अब्बासजीअहमद और अब्बास अली फिदा था इन पांचों का व्यवहार और व्यक्तित्व एक दूसरे से काफी बेहतर था लेकिन यह सभी आपस में अभिन्न मित्र थे और आजीवन रहे। इनके बीच घनिष्ठता का एक मुख्य कारण था इन सबका हंसमुख और ज़िन्दादिल होना। उनके सब के स्वभाव में बिल्कुल खुलापन था। उन सबकी यह बातें लेख को इतना भाग गयी कि अलग व्यक्तित्व होने के बावजूद उनकी आपस में इतनी घनिष्ठता हो गई और वह आजीवन मित्रता के बंधन में बंध गए और इतना ही नहीं बोर्डिंग के बाद भी इस बंधन से अलग नहीं हो पाए और जीवनपर्यारत एक दूसरे के साथ रहे।


2. ‘प्रतिभा छुपाए नहीं छुपती’ कथन के आधार पर मकबूल फिदा हुसैन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: मकबूल फिदा हुसैन व्यक्तित्व बहुत रचनात्मक रहा है वो प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं जब वो अपनी दुकान पर बैठते थे तो उनका ध्यान हमेशा आसपास की घटनाओं पर केंद्रित रहता था वो हमेशा आसपास की चीजों की आकृति बनाते रहते थे। उसकी बनाई हुई आकृति को देखकर उनके पिता उनकी कला के कायल हो गए। सिंहगढ़ फ़िल्म देखने के बाद उनके जीवन में कला के प्रति बड़ा बदलाव आया और उनके मन में आयल पेंटिंग के प्रति जुनून भर गया। ऑयल पेंटिंग करने के लिए उन्होंने अपनी किताबें बेच दी और अपनी पहली ऑयल पेंटिंग बनाई। अपनी चित्रकला के प्रति जुनून ने मकबूल फिदा हुसैन को दुनिया का एक नामी चित्रकार बना दिया।इसलिए कहा जाता है ‘प्रतिभा छिपाए नहीं छिपती‘। 


3. ‘लेखक जन्मजात कलाकार हैं’ इस आत्मकथा में सबसे पहले यह कहा उद्घाटित होता है?

उत्तर: बोर्डिंग स्कूल में जब लेखक 1 दिन अपने चित्रकला की कक्षा में उपस्थित होता है तो चित्रकला के मास्टरजी ब्लैक बोर्ड पर एक चिड़िया का चित्र बनाते हैं और वहाँ पर उपस्थित सभी विद्यार्थियों से कहते हैं कि सब लोग अपनी अपनी स्लेट पर उस चिड़िया का चित्र बनाएँ। लेकिन सिर्फ लेखक छोड़कर अतिरिक्त कोई भी उस चित्र को नहीं बना पाता है। चित्र बनाने के कारण लेखक की चित्रकला की प्रतिभा उभर कर सामने आती है और लेख को इसके लिए दस में से दस अंक मिलते हैं।


4. दुकान पर बैठे-बैठे भी मकबूल के भीतर का कलाकार उसके किन कार्यकर्ताओं से अभिव्यक्त होता है?

उत्तर: दुकान पर बैठने के बाद भी मकबूल का पूरा ध्यान ड्राइंग और पेंटिंग पर था।। आसपास के झुंड पर उसकी कड़ी नजर रहती थी। उसी समय, उसने अपने आसपास के जीवन को 20 रेखा चित्रों में उकेरा। दुकान पर बैठे बैठे ही वो इधर उधर से आने वाले व्यक्तियों और वस्तुओं की रेखा चित्र बनाता था। इसमें वो बैठने वाले लोगों के स्कैच बनाता था। घूँघट से ढकी मेहतारानी, एक पगड़ी और पेंच के साथ एक गएक पगड़ी और पेंच के साथ एक गेहूं की बोरी लिए हुए मजदूर, दाढ़ी वाला पठान, और बकरी के बच्चों के साथ साथ और भी ढेर सारे चित्र बनाएँ। अपनी पहली “ऑयल पेंटिंग भी दुकान पर बैठकर ही बनाई।” फ़िल्म ‘सिंघगढ़’ से प्रेरित होकर उसने अपनी किताबें बेच दी और ऑयल पेंटिंग करना आरंभ किया। इस फ़िल्म ने उसके जीवन पर बहुत प्रभाव डाला।


5. प्रचार प्रसार के पुराने तरीकों और वर्तमान तरीकों में क्या फर्क आया है? पाठ के आधार पर बताएं।

उत्तर: प्रचार के पुराने तरीकों और वर्तमान तरीकों में बहुत अंतर आया है। आज प्रचार प्रसार के साधन सुलभ हो गए हैं जिसके माध्यम से आम लोगों तक पहुँच बहुत सरल हो गई है। इसके अलावा मनोरंजन के साधनों में भी विकास हुआ है। दूरदर्शन ने इसे बहुत आसान बना दिया है। पुराने समय में प्रचार के लिए फ़िल्म के पोस्टरों को तांगे पर या ठेले पर लगाकर चारो तरफ घूमा घूमा कर प्रचार किया जाता था। साथ में बैंड भी बजाया जाता था। यह पूरा समूह प्रचार करने के लिए शहर में घूमता रहता था। फ़िल्म सिंहगड का प्रचार उसी तरह किया गया था। पतंग बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रंगीन कागज पर अभिनेता और अभिनेत्रियों के चित्र छपे हुए थे। यह हर घर में विपरीत किया गया था। आज टीवी, सिनेमा, समाचार पत्र, इंटरनेट इस तरह का प्रचार होर्डिंग बोर्ड आदि के माध्यम से किया जाता था। आज प्रचार का खर्च थोड़ा अधिक करना पड़ता है लेकिन पूरा काम समय पर होता है। प्रचार की पूरी जिम्मेदारी आजकल विज्ञापन कंपनी और कार्यक्रम आयोजक लेते हैं। इसके लिए अब शहर-शहर और गांव-गांव नहीं जाना पड़ता।  यह हमारे समाज में बढ़ते वैज्ञानिक विकास और आधुनिकता की देन है।


6. कल कला के प्रति लोगों का नजरिया पहले कैसा था? उसमें अब क्या बदलाव आए हैं?

उत्तर: आजकल लोगो मैं कला और कलाकार के प्रति नजरिया बहुत बदला है लोग अब कला और कलाकारों की बहुत इज्जत करते हैं तथा उन्हें अब प्रसिद्ध  व्यक्तियों मैं शामिल करते हैं। लेकिन पहले ऐसा नहीं था पहले कलाकारों की इतनी कद्र नहीं की जाती थी। पहले उन्हें राजा के यहाँ, अफसरों के यहाँ, अमीर लोगों के यहाँ तिवार की शोभा बढ़ाने के लिए तस्वीर बनाने वाला माना जाता था। उस समय के कलाकार कला को आजीविका के रूप में नहीं सोच सकते थे। लेकिन आजकल आ की प्रसिद्धि इतनी बड़ी है कि किसी नामी कलाकार की कृति काफी ज्यादा पैसों में बिकती है जिससे पैसा और नाम दोनों कमाया जाता है। कोई कोई कृति इतनी महंगी होती है कि आम इंसान इसे नहीं खरीद पाता तो वो उस कृति की प्रतिलिपि ही खरीदकर अपने घर की दीवारों की शोभा बढ़ाते हैं। इस प्रकार यह कहना बिल्कुल गलत नहीं है कि आज के समय में कला और कलाकार दोनों के प्रति लोगों का नजरिया बदल चुका है


7. मक मकबूल के पिता के व्यक्तित्व की तुलना अपने पिता के व्यक्तित्व से कीजिए?

उत्तर: मेरे पिता और मकबूल के पिता के व्यक्तित्व की तुलना कुछ यूं की जा सकती है:

1. पुत्र के प्रति प्यार और समझदारी: मकबूल के पिता को जब लगा कि दादा की मृत्यु के पश्चात उनका बेटा उस शौक से बाहर नहीं निकल पा रहा है तो उन्होंने कोई ज़ोर जबरदस्ती नहीं दिखाई बल्कि उसका दाखिला बोर्डिंग स्कूल में करवा दिया ताकि वह जाकर उसका मन बदल सके, उसके नए दोस्त बने और नए दोस्तों के साथ रहकर वो धीरे धीरे अपने दादा की यादों से उबर सके और ऐसा हुआ कि मकबूल अपने दादाजी की मृत्यु को भूलने लगा।

मकबूल और मेरे पिता में यह समानता है कि मेरे पिता भी मकबूल के पिता की तरह समझदार और मुझसे प्यार करने वाले हैं। उन्होंने मेरे साथ कभी भी शक्ति नहीं की है और हमेशा कोशीश करते हैं कि मैं सहज रह सकूँ

2.कला और प्रतिभा के प्रति कद्रदान: मकबूल के पिता ने मकबूल की प्रतिभा को पहचाना और उसकी शाबाशी देते हुए उसका पूरा समर्थन किया। बेटी की कला देखकर वह काफी प्रसन्न हो गए और बेंद्रे साहब के कहने से ही उसके लिए ऑयल पेंटिंग का सामान मंगवा दिया इससे यह ज्ञात होता है कि वे प्रतिभा और कला के प्रति कद्रदान थे।

मेरे पिता भी इस मामले में वैसे ही है, संगीत में मेरी रुचि है यह देख मेरे पिताजी ने मुझे संगीत सीखने के लिए प्रेरित किया और मेरा दाखिला संगीत स्कूल में करा दिया। और मुझे जीवन में अपनी दिशा चुनने की स्वतंत्रता दी।

  1. भविष्य के प्रतिग्रसोची: मकबूल के पिता को पता था कि मकबूल एक अच्छा चित्रकार हैं और उन्होंने इस कला के प्रति मकबूल को हमेशा प्रेरित किया। वो मकबूल के भविष्य को सुनहरा बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने पारिवारिक संबंधों की परवाह नहीं की। पर आज मकबूल को चित्रकला जगत के प्रसिद्ध व्यक्तियों में गिना जाता है।

इससे उनके अग्रसोची होने का पता चलता है। अब तक मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ लेकिन यदि कभी हुआ तो मेरे पिता की सोच हालांकि मैने पिताजी के बारे में सबसे यही सुना है कि वह अग्रसोची है।


NCERT Solutions Class 11 Hindi Antra Chapter 2

Class 11 Hindi Antra Chapter 2 Dopeher ka Bhajan, is written by Shri Amarkant. In this chapter, the author described the lower-middle-class people and the economic problems that they face almost on a daily basis, such as, their economic conditions, rental issues, poverty, etc. He describes that the family is so poor, that they succumb to poverty and can't even have a proper meal two times a day but the protagonist Shiddeshwari manages to feed everyone in the family, but herself eats half a roti but makes sure that everyone else has eaten.

The story is about the family of Munshi Chandrika Prasad, he is a 45-year-old man, but he looks like a 55-year-old man, who has got wrinkles all over his body.  His family consists of his wife, himself, and their three sons, namely Ramchandra, Mohan, and Pramod. Ramchandra being the eldest of all, learns to do proofreading in a local newspaper office, while Mohan will appear for his 10th examination.

Shiddeshwari manages to cook for all, while her son Ramchandra adjusts to eating. He hesitates to eat his lunch, knowing that everyone else is also left to eat, therefore after much hesitation, Ramchandra eats. After everyone has their lunch, Shiddeshwari saves a portion of the lunch for her son Pramod and eats the leftover food herself. 

Here, the author has described the whole situation of living and striving in poverty in a very decent and lucid manner.

NCERT Solutions  Hindi Class 11 Antra 1 chapter 2 Dopeher ka bhajan has been written in a very easy language, the complete solution of the chapter is available for free of cost, which one can download to get the best preparation resources for the final examination.  The NCERT questions provided have been answered and explained in an understandable language by the teachers. Everything is available on the Vedantu website.


NCERT Solutions With the Latest Syllabus - Class 11 Hindi (Core and Elective)

CBSE prescribed Hindi Core syllabus is divided into two sections. Section A includes Aroh 1 and Vitan 1. All the answers to these two books are available in PDF format on the Vedantu website.

  • Hindi Elective syllabus is furthermore divided into two sections. Antra 1 is included in the syllabus of Class 11. Vedantu offers all the chapter-wise solutions in understandable language and is available in PDF format.

NCERT solutions Class 11 Hindi Antra consists of a total of 19 chapters, which includes 10 poems and 9 prose, and all the solutions to the questions are provided on the Vedantu Platform:

  • Chapter 1 - Idgah

  • Chapter 2 - Dopeher ka Bhojan

  • Chapter 3 - Torch Bechnewala

  • Chapter 4 - Gunge

  • Chapter 5 - Jyotiba Phule

  • Chapter 6 - Khanabados

  • Chapter 7 - Naye ki janm Kundli Ek

  • Chapter 8 - Uski maa

  • Chapter 9 - Bharat Varsh ki Unnati kaise ho sakti hain?

  • Chapter 10 Poem - Kabir

  • Chapter 11 Poem - Surdas

  • Chapter 12 Poem - Hasi ki Chot sapna darbar

  • Chapter 13 Poem - Padmakar

  • Chapter 14 Poem - Sandhya ke baad

  • Chapter 15 Poem - Jag tujhko dur jana sab ankhon ki asu ujle

  • Chapter 16 Poem - Neend Uchat jati hain

  • Chapter 17 Poem - Badal ko ghirte dekha hain

  • Chapter 18 Poem - Hastaskep

  • Chapter 19 Poem - Ghar main wapsi

All the exercises from NCERT books are proven to be best as it consists of easy, moderate and advanced levels. Therefore practising the questions along with the easily available solutions will help all the students to revise the book thoroughly.


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Vedantu offers chapter and section-wise NCERT Solutions for Class 11.  Similar Sample questions, Sample papers along with previous years questions are there which are prepared by passionate teachers who hold years of experience.

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FAQs (Frequently Asked Questions)

1. Are NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antra 1 Chapter 2 Enough to Prepare for the Final Examination?

Ans. Yes, the complete solution provided for the chapter Dopeher ka bhojan by Shri Amarkant with a complete study material is enough for scoring excellent marks in the final examination.

2. Which Website gives the Latest CBSE Prescribed Syllabus and the Books for Excellent Preparation Resources for Class 11 Final Examination?

Ans. Vedantu platform offers a wide range of study materials and best preparation resources in PDF format which can be used offline and online. It provides the best, revised CBSE Syllabus for Class 11, which can be downloaded by direct links.

3. Suggest a Multi-Service Platform for Downloading NCERT Books, NCERT Solutions, Chapter Summaries, Sample Papers in PDF Format for Class 11 Final Examination.

Ans. The most trustworthy and reliable platform for downloading sample papers, summaries, solutions in PDF format is the Vedantu app. One can download everything using direct links and in a hassle-free manner.

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