Daan Ka Hisaab Class 4 Notes CBSE Hindi Chapter 7 [Free PDF Download]

NCERT Class 4 Hindi Chapter 7 Daan Ka Hisaab Revision Notes

Class 4 Hindi syllabus comprises interesting chapters that have important morals. These chapters are important for teaching various moral values to children. One such chapter that teaches the meaning of greed and its consequences is Daan Ka Hisaab. This chapter has been explained in a very easy-to-understand manner by subject experts at Vedantu in the revision notes provided here.

 

By reading the revision notes, students can easily get an idea about the chapter and its true meaning. There are worksheets available on Vedantu that have exercises for students to practice. If you want to develop a good understanding of the chapter and need some help, then Daan ka Hisaab revision notes can help you out.


NCERT Solutions for Class 4 Hindi | Chapter-wise List

Given below are the chapter-wise NCERT Solutions for Class 4 Hindi. These solutions are provided by the Hindi experts at Vedantu in a detailed manner. Go through these chapter-wise solutions to be thoroughly familiar with the concepts.

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Access Class 4 Hindi Chapter 7 – दान का हिसाब Notes

लेखक परिचय:

  • इस कहानी के लेखक 'सुकुमार राय' है l

  • उनका जन्म 10 सितंबर 1930 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था l

  • इनकी प्रमुख रचना में 'आबोल ताबोल' शामिल है l

  • वे लेखक होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं l


कहानी का सारांशः

  • इस कहानी में एक कंजूस राजा और एक सन्यासी के बीच होने वाली बातों का उल्लेख किया गया है | 

  • इस कहानी के अनुसार, एक राजा था | वह अपने कपड़ों के ऊपर बहुत खर्चा किया करता था | लेकिन इतना धन होने के बाद भी वह किसी को भी दान नहीं देता था | 

  • उसके राजसभा में केवल बड़े लोगों की भलाई के बारे मे बात होती थी | गरीबों, विद्वानों, सज्जनों के बारे मे कोई नहीं सोचता था । 

  • एक बार वहां बहुत अकाल पड़ गया और बहुत से लोग भूखे-प्यासे मरने लगे । 

  • जब राजा ने यह  खबर सुनी तो उन्होंने मदद करने से इनकार कर दिया ।

  • जब लोगों ने राजा से सहायता मांगी तो उस निर्दयी राजा ने कहा कि आज अकाल है ,कल अगर भूकंप आया या कही लोगों के पास खाना नहीं है तो इस तरह सभी की सहायता करते-करते मेरा राजभंडार खाली हो जाएगा ।राजा की ऐसी बातें सुनकर सभी निराश होकर चले गए ।

  • अकाल बढ़ता गया और बहुत से लोग भूख से मरने लगे। 

  • कुछ लोग फिर से राजा के पास पहुंचे | उन्होंने राजा से केवल दस हजार रुपए देने की विनती की ।  लेकिन राजा ने देने से मना कर दिया। 

  • तभी एक व्यक्ति ने कहा कि आप लाखों रुपए मे से थोड़ा धन हमें देंगे तो कोई नुकसान होगा ।

  •  राजा ने फिर भी उनकी नहीं सुनी ।

  • इसके बाद दूसरे व्यक्ति ने कहा कि महल में प्रतिदिन हजारों रुपये सुगंधित वस्त्रों,

मनोरंजन और महल की सजावट में खर्च होते हैं | यदि इन रुपयों में से ही थोड़ा हमें मिल जाए तो सबकी जान बच सकती है । 

  • यह सुनकर राजा को गुस्सा आ गया और लोग उससे डरकर वहाँ से चले गए ।

  • दो दिन बाद एक बूढ़ा सन्यासी राजसभा में आया । उसने राजा को आशीर्वाद देते हुए अपनी इच्छा को पूरी करने की बात कही |

  • राजा अपनी तारीफ सुनकर खुश हुआ और सन्यासी से उसकी इच्छा पूछी ।

  • तब सन्यासी ने कहा कि वह राजकोष से बीस दिन तक भिक्षा लेना चाहता है| 

  • आगे उसने कहा कि पहले दिन जो भिक्षा ली जाएगी, दूसरे दिन उस भिक्षा का दुगुना देना होगा, फिर उसके तीसरे दिन उसका भी दुगुना, और  इसी तरह से प्रतिदिन दुगुना होता चला जाएगा । 

  • इसके बाद राजा ने उससे भिक्षा के बारे मे पूछा । 

  • तब सन्यासी ने कहा कि पहले दिन एक रुपया दिया जाए और बीस दिन तक दुगुने करके देते रहने का हुक्म दिया जाए | 

  • राजा ने उसकी बात मान ली और सन्यासी राजा की जय-जयकार करते हुए घर लौट गया।

  • राजा के आदेश के अनुसार रोज भिक्षा मिलने लगी ।

  • ठीक दो सप्ताह तक भिक्षा देने के बाद राज भंडारी ने हिसाब किया । उसने पाया कि धन बहुत कम हो गया है । उसने यह बात मंत्री को बताई | मंत्री भी चिंता में पड़ गया | 

  • उसने को बीस दिनों का हिसाब बताने को कहा । भंडारी ने बताया कि बीस दिनों मे दस लाख अड़तालीस हजार पाँच सौ पिचहत्तर रुपए कम हो जाएंगे ।

  • यह सुनकर मंत्री घबरा गया और राजा के पास जाकर भिक्षा के बीस दिनों का हिसाब बताया । 

  • राजा भी यह सुनकर घबरा गया और सन्यासी को राजसभा में बुलाया ।

  • संन्यासी के आते ही राजा उसके पैरों पर गिर पड़ा और उसे उसकी भिक्षा का हिसाब बताया ।

  • तभी संन्यासी ने गंभीर होकर कहा कि इस राज्य में लोग अकाल से मर रहे हैं । अगर आप मुझे केवल पचास हजार रुपए देंगे तो मैं इससे संतुष्ट हो जाऊंगा ।

  • इसके बाद सन्यासी को पचास हजार रुपए दे दिए गए ।

  • यह खबर पूरे गाँव मे फैल गई और सभी लोग  राजा को दानवीर कर्ण कहने लगे ।


नैतिक शिक्षा:

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है हमें एक-दूसरे के प्रति दया और परोपकार की भावना रखनी चाहिए |


शब्द - अर्थ:

शब्द

अर्थ

वाक्य में प्रयोग

सत्कार

सम्मान

राजा ने सन्यासी का सत्कार किया |

अकाल

खाने पीने की कमी पडना

राजा के गांव में बहुत अकाल पड़ गया था।

प्रकोप 

बहुत ज्यादा क्रोध

आज सोनू का प्रकोप बढ़ गया है ।  

गुहार लगाना

  प्रार्थना करना

सभी लोगों ने राजा से मदद की गुहार लगाई | 

रकम 

रुपए

मेरे पास 40 हजार की रकम है |

हुक्म

  आदेश 

राजा ने सभी को बाहर जाने का हुक्म दिया ।

लाचार

मजबूर

सभी गांव वाले बहुत लाचार हो गए ।


प्रश्न - उत्तर:

प्रश्न 1. राजा का स्वभाव कैसा था ?

उत्तर: राजा बहुत निर्दयी और कंजूस था l

 

प्रश्न 2. सभी गांव वालों की मदद किसने की ?

उत्तर: गांव वालों की मदद सन्यासी ने की थी l


प्रश्न 3. बूढ़े सन्यासी ने राजा के सामने क्या इच्छा रखी ?

उत्तर: सन्यासी ने कहा कि वह राजकोष से बीस दिन तक भिक्षा लेना चाहता है|


अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. राजकोष के भंडारी ने मंत्री को 20 दिनों का कितना हिसाब बताया ?

उत्तर: राजकोष की भंडारी ने 20 दिनों का हिसाब दस लाख अड़तालीस हजार पाँच सौ पिचहत्तर रुपए बताया l


प्रश्न 2.  कहानी के अंत में सभी गांव वाले राजा को दानवीर कर्ण क्यों कहने लगे ?

उत्तर: राजा ने सन्यासी को पचास हजार रुपए दिए थे । यह बात गांव में फैल चुकी थी कि राजा ने उनकी मदद की है । जिसके बाद सभी राजा को दानवीर कर्ण कहने लगे l


प्रश्न 3. इस पाठ से आपको क्या सीख मिली ?

उत्तर: इस पाठ से हमें यह सीख मिली कि हमें एक-दूसरे के प्रति दया और परोपकार की भावना रखनी चाहिए |


प्रश्न 4. नीचे लिखे गए शब्दों के दो अलग-अलग अर्थ होते हैं, उन्हें लिखो l

(क) पूर्व

उत्तर: (i) दिशा बताने के लिए

(ii) किसी से पहले

(ख) जल

उत्तर: (i) पानी

(ii) किसी वस्तु का जलना

(ग) मन

उत्तर: (i) हमारी इच्छा

(ii) वस्तु मापने की ईकाई

(घ) मगर

उत्तर: (i) लेकिन

(ii) मगरमच्छ


प्रश्न 5. चारो दिशाओं के नाम लिखो ।

उत्तर: पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण


प्रश्न 6. कर्ण कौन थे ?

उत्तर: कर्ण बहुत बड़े दानवीर थे l उनकी माता का नाम कुंती था l उन्होंने बहुत से निर्धन लोगों की सहायता भी की थी l


Importance of CBSE Class 4 Chapter 7 Summary

The chapter Daan Ka Hisaab Class 4 is all about a greedy king and a sage who teaches him a lesson. There was a greedy king who was incredibly rich but didn’t spend any money on his kingdom and his subjects. During a famine, he refused to pay a meager amount of Rs.10,000 to his people, who were dying of hunger. Very soon, a sage came to the king and asked for some alms. The king agreed to give him a small amount of money. However, the sage had one condition. He said that he would take just 1 Rupee on the first day but he will take double what he took the next day. The king agreed.


Very soon, the royal treasury began to lose money. When the king heard about it, he saw that the sage would have more than 10 lakh rupees on the 20th day, thus emptying the treasury. So, he asked the sage not to empty the royal treasury. The sage agreed on the condition that he would give Rs.50,000 to the famine-struck people. The greedy king had no other choice but to accept this condition. 


Benefits of Daan Ka Hisaab Question Answer Worksheets 

Now that you know the summary, here are some benefits of practicing the worksheets and revision notes of the chapter. 

  • Students will be able to solve important Class 4 Hindi Chapter 7 question answers easily with the help of the revision notes and Solutions of the worksheet questions. 

  • The subject matter experts at Vedantu have prepared the worksheets considering the CBSE standards and format. So, the worksheet contains important questions that might be asked in the exam.

  • If you have any doubts about the chapter, there are important details explained in the worksheets that will help clear your doubts easily.


Download Revision Notes for NCERT Class 4 Hindi Chapter 7

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FAQs on Daan Ka Hisaab Class 4 Notes CBSE Hindi Chapter 7 [Free PDF Download]

1. Why did the people of the kingdom go to the king?

There was a famine in the region and the people of the kingdom didn’t have anything to eat. Hence, they went to the king to get some help so that they can buy food items from another village to fill their stomachs.

2. Did the king help the people in need?

The king was very greedy so he refused to give any money to the people in his kingdom. He said that he would’ve considered their demand had they asked for 100 or 200 rupees but he couldn’t part away with Rs.10,000.

3. How much money did the sage ask from the king on the first day?

The sage claimed that he wasn’t too greedy and only asked for a single rupee on the first day. However, he also added a condition that he would take alms from the king for 20 days and each day the amount would be doubled from the previous day.

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